रांची में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को संशोधित इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत उपभोक्ताओं को अंग्रेजी के साथ हिंदी और स्थानीय भाषा में भी बिजली बिल उपलब्ध कराना होगा। निर्देश झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड समेत राज्य की सभी वितरण कंपनियों पर लागू है।
आयोग ने बिल की भाषा के साथ उसके फॉन्ट और प्रारूप को भी सामान्य उपभोक्ता के लिए आसानी से समझने योग्य बनाने को कहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, संबंधित अधिसूचना 15 मार्च 2024 को जारी हुई थी और अप्रैल 2024 से प्रभावी है, लेकिन हिंदी अथवा स्थानीय भाषा में बिल जारी करने का प्रावधान अब तक लागू नहीं हो सका है।
वितरण कंपनियों को आगामी नवंबर में दाखिल होने वाली वार्षिक टैरिफ याचिका में लिखित रूप से बताना होगा कि संशोधित नियमों को किस सीमा तक लागू किया गया है। इससे आयोग को भाषा संबंधी प्रावधानों सहित आपूर्ति संहिता के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा करने का आधार मिलेगा।
नए बिजली कनेक्शन के शुल्क निर्धारण में भी बदलाव का प्रावधान है। विद्युतीकृत क्षेत्रों में 150 किलोवाट तक के कनेक्शन का शुल्क अब कनेक्शन के स्वीकृत लोड, उपभोक्ता श्रेणी और वितरण लाइसेंसी की औसत कनेक्शन लागत के आधार पर तय किया जाएगा। आवेदन के समय ही निर्धारित मांग शुल्क जमा करने की व्यवस्था भी बताई गई है।
नई प्रक्रिया का उद्देश्य प्रत्येक आवेदन पर अलग-अलग स्थल निरीक्षण और मांग शुल्क के विस्तृत आकलन की जरूरत घटाना है। इससे नए कनेक्शन के आवेदनों में कागजी प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है। हालांकि, कंपनियों को इन प्रावधानों को व्यवहार में लागू कर उनकी स्थिति आयोग के सामने स्पष्ट करनी होगी।
आयोग ने नया कनेक्शन देने और मौजूदा कनेक्शन में लोड बढ़ाने या घटाने तथा नाम बदलने जैसे कार्यों के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग अवधि रखी गई है, जबकि सुदूर ग्रामीण इलाकों की व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ विशेष रियायतों और छूट का प्रावधान किया गया है।