लातेहार जिले में मानसून के तीन महीनों—जून, जुलाई और अगस्त—के दौरान सर्पदंश के 413 मरीज इलाज के लिए विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें छह लोगों की मौत हुई। जुलाई में सर्वाधिक 189 मामले दर्ज किए गए। विभाग ने सर्पदंश की स्थिति में बिना देर किए पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी है।
प्रखंडवार आंकड़ों में लातेहार सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 185 मामले सामने आए। बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 90 और चंदवा में 64 मरीज पहुंचे। महुआडांड़ में 29, मनिका में 22 और बरवाडीह में छह मामले दर्ज किए गए। उपलब्ध विवरण में शेष मामलों का केंद्रवार ब्योरा नहीं दिया गया है।
बारिश के दिनों में सांपों के बिलों में पानी भरने के बाद उनके सूखी और सुरक्षित जगहों की ओर निकलने से खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान सांप घरों, खेतों और रिहायशी इलाकों के आसपास पहुंच सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अधिकतर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया और एंटी-वेनम मिलने से उनकी जान बचाई जा सकी।
बढ़ते मामलों के बीच जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में स्नेक वेनम एंटीसीरम का भंडार रखा गया है। दिए गए केंद्रवार आंकड़ों के मुताबिक कुल 18,042 एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं। सदर अस्पताल और लातेहार सीएचसी में 3,728 तथा महुआडांड़ में 3,037 इंजेक्शन होने की जानकारी दी गई है।
बालूमाथ में 2,785, बरवाडीह में 2,222 और चंदवा में 2,207 इंजेक्शन उपलब्ध बताए गए हैं। गारू में 1,863 तथा मनिका में 2,200 इंजेक्शन का स्टॉक है। विभाग का कहना है कि सर्पदंश के बाद शीघ्र उपचार मिलना मरीज की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
सिविल सर्जन राजमोहन खलको ने लोगों से झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय नहीं गंवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांप काटने पर पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचाया जाना चाहिए। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर एंटी-वेनम और आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध होने से जीवन बचने की संभावना बढ़ती है।