झारखंड हाईकोर्ट: केवल विवाह के आधार पर बेटी का अनुकंपा नियुक्ति दावा खारिज नहीं किया जा सकता

हाईकोर्ट ने सीएमपीएफओ को दिवंगत कर्मचारी की विवाहिता बेटी की अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया है।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट से संबंधित सांकेतिक दृश्य

रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में कहा है कि किसी बेटी का दावा केवल उसके विवाहित होने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (सीएमपीएफओ) को दिवंगत कर्मचारी की बेटी के पक्ष में आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता के पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है। वह अपनी बीमार मां के साथ रहकर उनकी देखभाल कर रही है। कोर्ट के अनुसार, महिला के पति की मामूली आय को इस निष्कर्ष का आधार नहीं बनाया जा सकता कि वह अपने पिता पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं थी।

यह मामला धनबाद की एक कोयला खदान में सहायक पद पर कार्यरत अर्जुन प्रसाद के परिवार से संबंधित है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 25 नवंबर 2013 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी ने बेटी को अनुकंपा पर नौकरी देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन सीएमपीएफओ ने जुलाई 2017 में बेटी के विवाहित होने का हवाला देकर आवेदन अस्वीकार कर दिया।

बेटी ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत से नए सिरे से आवेदन देने की अनुमति मिलने के बाद भी संगठन ने फरवरी 2024 में उसका दावा दोबारा खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने फिर हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई में अदालत ने उसकी आर्थिक स्थिति और मां की देखभाल की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण माना।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उसकी मां शारीरिक श्रम करने में सक्षम नहीं हैं और दोनों बेटे अलग रहते हैं। मां-बेटी मामूली पेंशन पर जीवनयापन कर रही हैं। दूसरी ओर, सीएमपीएफओ ने दलील दी कि पिता की मृत्यु के समय बेटी विवाहित थी, उसका पति कमाता है और दोनों भाई भी नौकरी करते हैं।

अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर याचिकाकर्ता की आर्थिक निर्भरता स्वीकार की और कहा कि विवाह अपने आप में अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करने का पर्याप्त आधार नहीं है। आदेश के तहत संगठन को निर्धारित आठ सप्ताह की अवधि में नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।