कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया में जूट से उपयोगी सामान बनाने की पहल महिलाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बन रही है। इंदरवा की राधा यादव महिला विकास समिति के तहत 20 महिलाओं के समूह के साथ काम कर रही हैं। समूह में शामिल महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ उत्पादन के लिए भी समय निकाल रही हैं।
समूह जूट के झोले, बोतल बैग, फोल्डर फाइल, डायरी कवर, लैपटॉप बैग और दीवार पर टांगने वाले बैग तैयार करता है। इसके अलावा महिलाओं के लिए पर्स और हैंडबैग भी बनाए जा रहे हैं। ये वस्तुएं दैनिक उपयोग के साथ प्लास्टिक तथा रैक्सिन से बने कुछ उत्पादों के विकल्प के रूप में पेश की जा रही हैं।
राधा यादव को बचपन से क्रोशिया के खिलौने और सुतरी से शैक्षणिक मॉडल बनाने में रुचि थी। विवाह के बाद उन्होंने इसी हुनर को रोजगार से जोड़ने की योजना बनाई। विचार को महिला समूह की दूसरी सदस्यों के साथ साझा करने के बाद सामूहिक रूप से जूट उत्पाद बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ।
इस काम के लिए राधा और समूह की महिलाओं ने चेचाई स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद यह पहल मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड से जुड़ी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बोर्ड की ओर से 90 प्रतिशत अनुदान पर इलेक्ट्रिक और मैनुअल सिलाई मशीनें दी गईं, जिनसे उत्पादन में सहायता मिल रही है।
समूह की महिलाएं घर का काम पूरा करने के बाद प्रतिदिन करीब चार से पांच घंटे जूट उत्पाद बनाने में लगाती हैं। इस गतिविधि से उन्हें आमदनी अर्जित करने का अवसर मिला है। राधा यादव युवतियों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर आवश्यक कौशल सिखाने और उन्हें स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही हैं।
जूट प्राकृतिक रेशा होने के कारण इस पहल का पर्यावरणीय पक्ष भी है। इससे बने झोले, फोल्डर और बैग रोजमर्रा में प्लास्टिक की कुछ वस्तुओं की जगह इस्तेमाल किए जा सकते हैं। फिलहाल गतिविधि 20 महिलाओं के समूह के स्तर पर चल रही है, जबकि युवतियों के प्रशिक्षण से आगे और लोगों के इससे जुड़ने की संभावना बन रही है।