रांची में राज्य के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख उपक्रमों के बीच वर्षों से लंबित बकाये को सुलझाने की प्रक्रिया जारी है। तेनुघाट विद्युत ताप निगम लिमिटेड (टीवीएनएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) के परस्पर लेनदेन में वित्त विभाग मध्यस्थता कर रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अलग-अलग संस्थानों के खातों में दर्ज देनदारियों का समायोजन करना है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, टीवीएनएल बोकारो जिले के ललपनिया स्थित संयंत्र में बिजली उत्पादन के लिए सीसीएल से कोयला लेता है। वर्ष 2015 से सीसीएल का टीवीएनएल पर बकाया बढ़कर करीब 2,800 करोड़ रुपये हो गया था। दूसरी ओर, जमीन और अन्य मदों में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का भी सीसीएल पर बकाया बताया गया है।
वित्त विभाग के समन्वय से राजस्व विभाग और सीसीएल के बीच दर्ज देनदारी के आधार पर टीवीएनएल के लगभग 2,344 करोड़ रुपये के बकाये का सैद्धांतिक समायोजन किया गया है। हालांकि, सभी संस्थानों का लेखा अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है और बड़ी राशि का हिसाब तथा भुगतान शेष बताया गया है।
टीवीएनएल का जेवीवीएनएल के साथ भी पुराना वित्तीय लेनदेन लंबित है। उपलब्ध जानकारी में इसकी कुल राशि करीब 8,100 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें पूर्ववर्ती झारखंड राज्य बिजली बोर्ड के समय का बकाया भी शामिल होने की बात कही गई है। वर्ष 2024 में वित्त विभाग को इन संस्थानों के बीच समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी गई थी।
टीवीएनएल प्रबंधन के मुताबिक, जेवीवीएनएल से पूरा बकाया मिलने और अन्य देनदारियों के निपटारे के बाद निगम नए बिजली संयंत्र की दिशा में आगे बढ़ सकेगा। फिलहाल इसे संभावना के रूप में ही देखा जा रहा है, क्योंकि नई परियोजना की प्रगति शेष भुगतान और वित्तीय व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
सीसीएल के वित्तीय पक्ष के अनुसार, समायोजन के बाद भी टीवीएनएल उसके बड़े बकायेदारों में शामिल है। करीब 950 करोड़ रुपये की मौजूदा कुल बकाया राशि में लगभग 500 करोड़ रुपये टीवीएनएल से संबंधित बताए गए हैं। वित्त विभाग की मध्यस्थता से कुछ राशि का समाधान हुआ है, लेकिन पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के लिए बाकी खातों का मिलान और लेनदेन पूरा करना आवश्यक होगा।