कैरो में दीपावली के लिए मिट्टी के दीये बनाने में जुटे कारीगर, बिक्री बढ़ने की उम्मीद

लोहरदगा के कैरो प्रखंड में स्थानीय कारीगर दीपावली के बाजार के लिए दीये, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां और मिट्टी के खिलौने तैयार कर रहे हैं।

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लोहरदगा के कैरो में दीपावली के लिए मिट्टी के दीये तैयार करते स्थानीय कारीगर

लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड में दीपावली की तैयारियों के साथ मिट्टी के दीये बनाने का काम तेज हो गया है। प्रखंड मुख्यालय और आसपास के गांवों के कारीगर बाजार की संभावित मांग को देखते हुए दीयों के अलावा गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां तथा मिट्टी के विभिन्न खिलौने तैयार कर रहे हैं। त्योहार नजदीक होने के कारण उत्पादन बढ़ाने के लिए काम दिन-रात चल रहा है।

स्थानीय कारीगरों में लक्ष्मण महतो, जितबहान महतो और जोगी महतो भी शामिल हैं। उनका प्रयास है कि दीपावली से पहले पर्याप्त सामान तैयार हो जाए और खरीदारों को जरूरत के अनुसार दीये उपलब्ध कराए जा सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा अब भी कायम रहने से कारीगरों को स्थानीय बाजार से उम्मीद है।

बाजार में सामान्य मिट्टी के दीये फिलहाल करीब 25 से 30 रुपये प्रति दर्जन की दर से बिक रहे हैं। कारीगर लक्ष्मण महतो के अनुसार, दीपावली करीब आने के साथ इनकी मांग और बढ़ सकती है। इसी संभावना को देखते हुए परिवार और स्थानीय कारीगर तेजी से निर्माण कार्य पूरा करने में लगे हैं।

हाल के वर्षों में चाइनीज झालरों और बिजली से चलने वाली सजावटी बत्तियों का इस्तेमाल बढ़ने से मिट्टी के दीयों की मांग प्रभावित हुई थी। स्थानीय कारीगरों का कहना है कि पिछले वर्ष से पारंपरिक दीयों के प्रति खरीदारों की रुचि फिर बढ़ती दिखाई दी है। इस बदलाव के चलते उन्हें इस बार बेहतर बिक्री की आशा है।

दीयों के साथ पूजा में उपयोग होने वाली गणेश-लक्ष्मी की मिट्टी की मूर्तियां और अन्य सजावटी सामान भी बनाए जा रहे हैं। कारीगरों को उम्मीद है कि अलग-अलग उत्पाद उपलब्ध होने से त्योहारी बाजार में उनकी आमदनी बढ़ेगी। अब उनकी नजर दीपावली से पहले होने वाली खरीदारी और स्थानीय बाजार में मिट्टी के सामान की वास्तविक मांग पर है।