पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड स्थित पुरनिया गांव में बुधवार को विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को न्याय प्राप्त करने के उपलब्ध रास्तों, कानूनी सहायता की व्यवस्था और उनके अधिकारों से परिचित कराया गया। इस दौरान डायन कुप्रथा जैसी सामाजिक बुराई के प्रति भी लोगों को सचेत किया गया।
शिविर का आयोजन झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, चाईबासा ने किया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर और सचिव रवि चौधरी के निर्देशन में आयोजित हुआ।
पैनल अधिवक्ता महेंद्र दोराईबुरू ने उपस्थित लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में बताया। उन्होंने उपभोक्ता फोरम और सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी, ताकि जरूरत पड़ने पर ग्रामीण उपयुक्त संस्था या प्रक्रिया के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की आदिवासी अधिकार संरक्षण एवं प्रवर्तन योजना-2015 पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों को बताया गया कि यह पहल अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों की न्याय तक पहुंच आसान बनाने, उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण से जुड़ी है।
शिविर के दौरान डायन कुप्रथा को सामाजिक बुराई बताते हुए इसके खिलाफ जागरूक रहने पर जोर दिया गया। कानूनी विषयों को केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि ग्रामीणों को अपनी जिज्ञासाएं सामने रखने का अवसर भी मिला। उपस्थित लोगों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे।
कार्यक्रम में गांव के मुंडा, अधिकार मित्र और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। गांव स्तर पर आयोजित इस शिविर का केंद्र लोगों को उपलब्ध कानूनी व्यवस्थाओं और अधिकार-संरक्षण से संबंधित योजनाओं की जानकारी देना रहा।