बोकारो के ललपनिया स्थित तेनुघाट ताप विद्युत स्टेशन में कोयले की उपलब्धता गंभीर स्तर तक घट गई है। संयंत्र प्रबंधन के मुताबिक फिलहाल केवल पांच दिनों के उत्पादन के लिए कोयला बचा है। आपूर्ति जल्द नहीं बढ़ी तो औसतन 320 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले इस स्टेशन का उत्पादन प्रभावित या बंद हो सकता है।
तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड के अनुसार, निर्बाध उत्पादन के लिए संयंत्र में कम से कम 20 दिनों का सुरक्षित भंडार होना चाहिए। दोनों इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्रतिदिन करीब छह हजार टन, यानी दो रैक कोयले की जरूरत बताई गई है। एक रैक में औसतन लगभग 3,500 टन कोयला आता है।
प्रबंधन का कहना है कि अभी दो के बजाय प्रतिदिन केवल एक रैक मिल रहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक पिछले महीने जरूरत 50 रैक की थी, जबकि संयंत्र को 17 रैक ही मिले। सितंबर में कुछ दिन ऐसे भी रहे जब एक भी रैक नहीं पहुंचा। इसके कारण पहले से जमा कोयले का भंडार लगातार कम होता गया।
कोयला आपूर्ति घटने के पीछे हाल की बारिश और खदानों में जलजमाव को कारण बताया गया है। खुले क्षेत्र वाली कई खदानों में पानी भरने से खनन प्रभावित होने की बात सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में सीसीएल ने 6.07 मिलियन टन के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 5.57 मिलियन टन उत्पादन किया, जो लक्ष्य का 91.72 प्रतिशत है।
स्थिति को देखते हुए तेनुघाट प्रबंधन ने राज्य सरकार और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें संयंत्र के लिए कोयले की आपूर्ति तत्काल बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। प्रबंधन ने एक से दो दिनों के भीतर आपूर्ति में सुधार नहीं होने पर उत्पादन रुकने की आशंका जताई है।
तेनुघाट स्टेशन के उत्पादन में रुकावट आने पर राज्य की बिजली उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि अभी संयंत्र में उत्पादन जारी रहने की जानकारी है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सीसीएल से अतिरिक्त रैक कितनी जल्दी पहुंचते हैं और कोयले का सुरक्षित भंडार दोबारा तैयार हो पाता है या नहीं।