सिमरिया के दूध शीतलन केंद्र से 25 गांवों के करीब पांच हजार पशुपालक जुड़े

सिमरिया और टंडवा प्रखंड के पशुपालकों को दूध की गुणवत्ता के आधार पर मूल्य, समय पर बैंक भुगतान और अतिरिक्त बोनस मिलने की जानकारी दी गई है।

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चतरा जिले के सिमरिया में स्थापित मेधा दूध शीतलन केंद्र से सिमरिया और टंडवा प्रखंड के 25 गांवों के करीब पांच हजार पशुपालक जुड़े हैं। चार हजार लीटर क्षमता वाले इस केंद्र के माध्यम से किसानों से दूध खरीदा जा रहा है। इससे उन्हें स्थानीय बिचौलियों और उधार पर होने वाली बिक्री पर निर्भरता घटाने में मदद मिली है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र पर आधुनिक मशीनों से दूध में फैट और एसएनएफ की जांच की जाती है। इसी गुणवत्ता जांच के आधार पर कीमत तय होती है और किसानों को अधिकतम 80.39 रुपये प्रति लीटर तक भुगतान मिलने की बात कही गई है। कंपनी की ओर से प्रति लीटर पांच रुपये का अतिरिक्त बोनस भी सीधे पंजीकृत किसानों के बैंक खातों में भेजा जाता है।

वर्ष 2018 में मेधा डेयरी के आने से पहले क्षेत्र के कई पशुपालक दूध बेचने के लिए स्थानीय होटलों या बिचौलियों पर निर्भर थे। किसानों के अनुसार, उस व्यवस्था में उचित मूल्य पाने और भुगतान के लिए कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब तय समय पर बैंक खाते में राशि आने से दूध की बिक्री के लिए अधिक व्यवस्थित बाजार उपलब्ध हुआ है।

केंद्र से जुड़े पंजीकृत किसानों के लिए प्रशिक्षण और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाओं की भी जानकारी दी गई है। कम दर पर पशुओं के इलाज की व्यवस्था के साथ साल में निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पंजीकृत किसान के परिवार में बेटी या बहू के गर्भवती होने पर छह किलोग्राम आहार तथा पोषण सामग्री उपलब्ध कराने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

कुट्टी में पहले संचालित दूध संग्रह केंद्र को अब बल्क मिल्क कूलिंग सेंटर में बदला गया है। कुट्टी दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, समिति के गठन से स्थानीय स्तर पर दूध संग्रह की व्यवस्था मजबूत हुई है। समिति को कंपनी की ओर से चार प्रतिशत बोनस दिए जाने की भी जानकारी दी गई है।

केवटा, गोवा, कुट्टी और सिमरिया के पशुपालकों ने बताया कि नियमित खरीद और भुगतान की व्यवस्था से शाम के दूध की बिक्री को लेकर उनकी चिंता कम हुई है। केंद्र से जुड़े आंकड़े और सुविधाएं बताती हैं कि संगठित दूध खरीद प्रणाली ने क्षेत्र के पशुपालकों को एक स्थिर बाजार दिया है, हालांकि इसका लाभ पंजीकरण और दूध की गुणवत्ता से जुड़ी व्यवस्था पर आधारित है।