दुमका जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बहराबांक गांव में बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोने के बाद एक छह वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। कमरे में मौजूद उसकी मां और दो अन्य बच्चियों को भी बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें महिला और एक बच्ची की स्थिति गंभीर बताई गई है, जबकि 11 दिन की नवजात खतरे से बाहर है।
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, नवजात को ठंड से बचाने के लिए रात में कमरे के भीतर अंगीठी जलाई गई थी। मां अपनी नवजात और दो अन्य बेटियों के साथ उसी कमरे में सोई थीं। सुबह काफी समय तक दरवाजा नहीं खुलने पर दूसरे कमरे में सो रहीं बच्चियों ने परिजनों को इसकी सूचना दी।
परिजनों ने दरवाजा तोड़ा तो महिला और तीनों बच्चियां अचेत मिलीं। सभी को दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने छह वर्षीय निक्की कुमारी को मृत घोषित कर दिया। रीना देवी और रूपाली कुमारी का इलाज जारी है।
प्रारंभिक जानकारी में आशंका जताई गई है कि बंद कमरे में अंगीठी से निकले धुएं के कारण दम घुटने से यह घटना हुई। हालांकि घटना का वास्तविक कारण अभी जांच का विषय है और चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए धुएं को मौत का निश्चित कारण नहीं माना गया है।
मुफस्सिल थाना पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घटना के बारे में जानकारी जुटाई। पुलिस के मुताबिक महिला और तीन बच्चियों को बेहोशी की अवस्था में अस्पताल लाया गया था। एक बच्ची की मौत हो चुकी है और अन्य का उपचार चल रहा है। मामले की जांच की जा रही है।
घटना ने बंद कमरे में अंगीठी के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को फिर सामने रखा है। परिवार फिलहाल अस्पताल में भर्ती सदस्यों के उपचार पर ध्यान दे रहा है। पुलिस जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही घटनाक्रम तथा मौत के कारण की स्पष्ट पुष्टि हो सकेगी।