देवघर के रामकृष्ण मठ में कुमारी पूजा, तीन वर्ष की सृजा बनीं देवी का स्वरूप

कुंडा स्थित रामकृष्ण मठ में महाष्टमी पर बेलूर मठ की परंपरा के अनुसार कुमारी और संधि पूजा हुई। अनुष्ठान में 108 दीप और 108 कमल पुष्प अर्पित किए गए।

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देवघर के रामकृष्ण मठ में महाष्टमी पर आयोजित कुमारी पूजा और संधि पूजा का दृश्य

देवघर के कुंडा स्थित रामकृष्ण मठ में सोमवार को महाष्टमी के अवसर पर पारंपरिक विधि-विधान से कुमारी पूजा और संधि पूजा संपन्न हुई। बेलूर मठ की रीति के अनुसार आयोजित अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ से आश्रम परिसर भक्तिमय बना रहा।

कुमारी पूजा में तीन वर्ष सात माह की सृजा शांडिल्य को देवी का स्वरूप मानकर आराधना की गई। सृजा, सत्यम शांडिल्य की पुत्री हैं। सत्यम वर्ष 2006 में रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, देवघर की दसवीं कक्षा के छात्र रह चुके हैं।

रामकृष्ण परंपरा में कुमारी पूजा को नारी शक्ति और देवी की जीवंत उपस्थिति के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। इसी मान्यता के अनुरूप बालिका का पूजन किया गया और धार्मिक अनुष्ठानों को निर्धारित परंपरा के अनुसार पूरा किया गया।

महाष्टमी और महानवमी के संधिकाल में विशेष संधि पूजा भी आयोजित हुई। इस दौरान मां दुर्गा को 108 दीप और 108 कमल पुष्प अर्पित किए गए। धार्मिक मान्यता में इस संधिकाल को मां दुर्गा के चामुंडा रूप और चंड-मुंड वध की कथा से जोड़ा जाता है।

रामकृष्ण मठ में दुर्गापूजा की यह परंपरा पिछले 75 वर्षों से चली आ रही है। यहां होने वाले अनुष्ठानों में बेलूर मठ की पूजा-पद्धति का पालन किया जाता है और महाष्टमी की कुमारी पूजा इस आयोजन का प्रमुख हिस्सा रहती है।

यह आश्रम पहले रामकृष्ण साधन मंदिर के नाम से जाना जाता था। अब यह रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ का आधिकारिक शाखा केंद्र है। संस्थान में परंपरागत पूजा-अनुष्ठानों के माध्यम से दशकों पुरानी आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है।