देवघर के 1,981 सरकारी स्कूलों में सिर्फ 81 एसएमसी गठित, 31 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश

संताल परगना में स्कूल प्रबंधन समितियों के गठन की रफ्तार धीमी है। 24 अगस्त तक देवघर चार प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रमंडल में सबसे पीछे था।

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देवघर के सरकारी विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन समिति गठन की प्रक्रिया

देवघर के सरकारी विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा से पहले भी काफी पीछे है। 24 अगस्त 2026 तक उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले के 1,981 विद्यालयों में केवल 81 में समिति का गठन पूरा हुआ था। चार प्रतिशत उपलब्धि के साथ देवघर संताल परगना के छह जिलों में अंतिम स्थान पर रहा।

विभागीय विवरण में देवघर के 1,675 विद्यालयों में एसएमसी गठन की प्रक्रिया लंबित बताई गई है। राज्य परियोजना कार्यालय ने सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में नई समिति गठित करने का निर्देश दिया है। विद्यालयों को गठन से जुड़ी जानकारी ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर भी दर्ज करनी है।

इस प्रक्रिया को भारत सरकार की स्कूल प्रबंधन समिति गाइडलाइंस-2026 के अनुरूप पूरा किया जाना है। इसके लिए 31 अगस्त की समय सीमा तय की गई है। उपलब्ध आंकड़ों की तारीख से अंतिम समय सीमा के बीच केवल एक सप्ताह का अंतर होने के कारण देवघर के शिक्षा पदाधिकारियों के सामने बड़ी संख्या में लंबित विद्यालयों तक पहुंचने की चुनौती है।

एसएमसी के गठन का उद्देश्य विद्यालयों के संचालन में बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसी कारण समिति बनाने के साथ उसका विवरण डिजिटल प्रणाली में अपडेट करने को भी प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा रखा गया है। जिले में कम प्रगति के कारण अब गठन और ऑनलाइन प्रविष्टि, दोनों काम समय पर पूरे करने होंगे।

संताल परगना के अन्य जिलों में भी काम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जामताड़ा 64 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रमंडल में सबसे आगे था। पाकुड़ के 1,009 विद्यालयों में 361, गोड्डा के 1,592 विद्यालयों में 333 और साहिबगंज के 1,341 विद्यालयों में 135 समितियों का गठन पूरा होने की जानकारी दी गई है।

निर्धारित समय सीमा नजदीक होने के बीच सभी छह जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों को लंबित विद्यालयों में प्रक्रिया तेज करनी होगी। देवघर में शेष काम का आकार सबसे बड़ा दिखाई देता है। अब प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि विद्यालय स्तर पर समिति गठन और ई-विद्यावाहिनी पर सूचना दर्ज करने का काम 31 अगस्त तक कितनी तेजी से पूरा किया जाता है।