देवघर जिले के 33 प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शौचालय निर्माण की धीमी प्रगति पर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। इन विद्यालयों में बालक और बालिकाओं के लिए कुल 42 शौचालय बनाए जाने हैं, लेकिन नौ महीने की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी अधिकांश काम पूरा नहीं हो सका है।
परिषद के 30 सितंबर 2026 के पत्र के अनुसार, प्रस्तावित निर्माण में 22 बालक और 20 बालिका शौचालय शामिल हैं। उपलब्ध प्रगति विवरण में 30 इकाइयों को अर्द्धनिर्मित बताया गया है, जबकि नौ स्थानों पर काम शुरू नहीं हुआ है। केवल तीन इकाइयों का निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई है।
काम में देरी को गंभीरता से लेते हुए परिषद ने संवेदक के खिलाफ एकरारनामा में तय दंडात्मक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य लंबित निर्माण की स्थिति स्पष्ट करना और विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए निर्धारित बुनियादी सुविधा का काम पूरा कराना है।
जेईपीसी ने प्रत्येक निर्माण स्थल की अद्यतन स्थिति जांचने के लिए जीपीएस युक्त तस्वीरें मांगी हैं। इसके साथ ही अंतिम मापी पुस्तिका और निर्माण से संबंधित पत्राचार की प्रतियां भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। इन अभिलेखों के आधार पर कार्य की वास्तविक प्रगति और भुगतान की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
संवेदक के विरुद्ध कार्रवाई में हुई देरी पर संबंधित कनीय अभियंता, सहायक अभियंता और कार्यपालक अभियंता से भी कारण पूछा गया है। परिषद ने सभी लंबित दस्तावेज एक सप्ताह के भीतर सौंपने का निर्देश दिया है, जिससे निर्माण और प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति का आकलन किया जा सके।
यह निर्देश संताल परगना के देवघर सहित दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में विद्यालयी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों की निगरानी के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल देवघर में अधूरे शौचालयों के दस्तावेज मिलने और तय प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया गया है।