देवघर समाहरणालय सभागार में सोमवार को जिला स्तरीय सतर्कता-सह-मॉनिटरिंग समिति की बैठक हुई। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 और संशोधित नियम, 2016 के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान जिले में दर्ज मामलों की कानूनी प्रगति और लंबित प्रकरणों की स्थिति पर चर्चा की गई। इसके साथ ही प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध राहत तथा मुआवजा राशि के भुगतान से जुड़े विषयों की भी समीक्षा हुई। प्रशासन ने संबंधित प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
उपायुक्त ने पुलिस और अभियोजन से जुड़े अधिकारियों को लंबित मामलों की जांच तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जांच के साथ आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को भी जल्द पूरा किया जाए, ताकि मामलों के निपटारे की दिशा में आगे की कार्रवाई समय पर हो सके।
जिला कल्याण विभाग को पात्र पीड़ितों के लिए राहत और मुआवजा राशि का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करने को कहा गया। उपायुक्त ने भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं होने देने का निर्देश देते हुए कहा कि समय पर आर्थिक सहायता मिलने से प्रभावित परिवारों को जरूरी संबल मिल सकेगा।
बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा तथा प्रभावित लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने को प्रशासन की प्राथमिकता बताया गया। उपायुक्त ने पुलिस, अभियोजन और कल्याण विभाग सहित संबंधित इकाइयों से आपसी समन्वय के आधार पर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा।
समीक्षा बैठक में दुमका सांसद नलिन सोरेन, मंत्री और विधायक के प्रतिनिधि, समिति के सदस्य, जिला कल्याण पदाधिकारी, मुख्यालय डीएसपी, एडीएसएस, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। समिति ने लंबित मामलों और सहायता भुगतान की प्रगति पर प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने पर बल दिया।