हजारीबाग शहर की कई प्रमुख सड़कों के किनारे खड़े सूखे और जर्जर पेड़ों से राहगीरों, यात्रियों तथा आसपास के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टहनियां गिरने की घटनाओं के बावजूद नगर निगम, बिजली विभाग और वन विभाग की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई है।
कल्लू चौक पर एक बड़ा सूखा पेड़ उस स्थान के पास खड़ा है, जहां चतरा जाने वाली बसें और छोटे वाहन रुकते हैं। यहां सुबह से शाम तक यात्रियों और राहगीरों की आवाजाही रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, पेड़ की सूखी डालियां बीच-बीच में गिरती हैं और पहले कुछ लोग इनकी चपेट में आकर घायल भी हुए हैं।
हजारीबाग-कटकमसांडी-चतरा मार्ग पर पेलावल स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक पेट्रोल पंप के पास भी टूटा हुआ सूखा पेड़ चिंता का कारण बना है। उसके नजदीक से 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन गुजरती है। स्थानीय स्तर पर दावा किया गया है कि तेज हवा के दौरान तार और पेड़ के संपर्क में आने से चिंगारी दिखाई देती है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के हवाले से बताया गया है कि पिछले मानसून में 12 स्थानों पर पेड़ गिरने के बाद 18 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। वहीं, वन विभाग ने 2024 में 67 सूखे पेड़ों की पहचान कर उनकी सूची नगर निगम को सौंपी थी। इनमें से 19 पेड़ काटे जाने और शेष के अब भी खड़े होने की जानकारी दी गई है।
शहर में इंद्रपुरी चौक से कोर्रा तक पांच, मटवारी गांधी मैदान रोड के आसपास चार, डेली मार्केट में दो और सदर अस्पताल रोड के आसपास तीन सूखे पेड़ बताए गए हैं। इनमें कुछ पेड़ बिजली के खंभों या तारों के पास हैं। शहरी क्षेत्र से सटे इलाकों में भी ऐसे कई पेड़ होने का उल्लेख किया गया है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग संयुक्त रूप से संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण करें और जोखिम के आधार पर सुरक्षित कटाई या छंटाई कराएं। व्यस्त परिवहन स्थलों, अस्पताल मार्ग, बाजार और बिजली लाइनों के पास मौजूद पेड़ों पर प्राथमिकता से कार्रवाई की मांग उठ रही है, ताकि किसी संभावित हादसे और बिजली व्यवधान को रोका जा सके।