देवघर में लिपिक वीडियो कॉल से करेंगे स्कूलों की निगरानी, रोज दो से तीन विद्यालयों की जांच

देवघर के शैक्षणिक कार्यालयों में तैनात लिपिक प्रतिदिन वीडियो कॉल के जरिए दो से तीन स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। उपस्थिति, मध्याह्न भोजन, पुस्तकालय और कक्षाओं की स्थिति दर्ज कर अधिकारियों को रिपोर्ट दी जाएगी।

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देवघर में वीडियो कॉल के माध्यम से स्कूलों की निगरानी की प्रतीकात्मक तस्वीर

देवघर जिले के स्कूलों की निगरानी के लिए शिक्षा विभाग ने लिपिक स्तर के कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। जिला और प्रखंड स्तर के शैक्षणिक कार्यालयों में कार्यरत लिपिक अपने नियमित काम के साथ प्रतिदिन दो से तीन विद्यालयों का वीडियो कॉल के माध्यम से निरीक्षण करेंगे। जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने इस संबंध में निर्देश जारी किया है।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक कर्मचारी को रोज करीब आधे से एक घंटे तक ऑनलाइन निरीक्षण करना होगा। इसमें जिला शिक्षा परियोजना कार्यालय, जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में तैनात सभी लिपिक शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य अधिक स्कूलों की नियमित निगरानी करना और उनकी कमियों की जानकारी समय पर जुटाना है।

वीडियो कॉल पर होने वाली जांच के लिए विभाग ने एक निर्धारित प्रारूप भी तैयार किया है। कर्मचारी शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति के अलावा मध्याह्न भोजन की स्थिति देखेंगे। पुस्तकालय तथा किताबों की उपलब्धता और अंग्रेजी व कंप्यूटर कक्षाओं के संचालन से जुड़ी जानकारी भी इसी प्रारूप में दर्ज की जाएगी।

निरीक्षण केवल शिक्षकों से मिली सूचना पर आधारित नहीं होगा। वीडियो कॉल के दौरान संबंधित स्कूल के कम से कम दो बच्चों से भी बातचीत की जाएगी, ताकि विद्यालय की वास्तविक स्थिति के बारे में सीधे विद्यार्थियों से जानकारी मिल सके। लिपिक तरुण कांत झा के अनुसार, दर्ज विवरण के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी जाएगी।

गोवर्धन उच्च विद्यालय के प्राचार्य हिमांशु शेखर ने कहा कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को विशेष लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक नियमित ऑनलाइन निगरानी से शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ने और विद्यालयों में कक्षा संचालन तथा उपस्थिति की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।

देवघर जिले में करीब दो हजार स्कूल हैं। शिक्षा विभाग के पदाधिकारी पहले से समय-समय पर विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण करते हैं। अब कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को जोड़कर निगरानी का दायरा बढ़ाने की कोशिश की गई है। ऑनलाइन जांच में मिली कमियों और व्यवस्थागत सूचनाओं को रिपोर्ट के रूप में अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।