धनबाद नेशनल लोक अदालत में 1.63 लाख मामलों का निपटारा, 1,567 करोड़ रुपये के विवाद सुलझे

कोयला नगर में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 1,63,441 मामलों का मौके पर निष्पादन हुआ। कार्यक्रम में कोविड से अनाथ हुए 62 बच्चों को छात्रवृत्ति सहायता से भी जोड़ा गया।

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धनबाद के कोयला नगर में आयोजित नेशनल लोक अदालत का कार्यक्रम

धनबाद के कोयला नगर स्थित बीसीसीएल सामुदायिक भवन में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में 1,63,441 मामलों का मौके पर निष्पादन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 1,567 करोड़ 25 लाख 20 हजार 215 रुपये के विवादों का निपटारा हुआ। आयोजन झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर किया गया था।

कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश और झालसा अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन के दौरान 166 करोड़ 34 लाख 63 हजार रुपये की परिसंपत्तियों और नियुक्ति पत्रों का वितरण दर्ज किया गया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने बताया कि शनिवार को लाभुकों के बीच करीब 10 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां बांटी गईं।

कोविड-19 के दौरान अनाथ हुए 62 बच्चों को झालसा के प्रोजेक्ट शिशु के तहत बीसीसीएल की कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व योजना से सहायता दी गई। इन बच्चों को हर वर्ष 20 हजार से 50 हजार रुपये तक की छात्रवृत्ति देने की व्यवस्था की गई है। न्यायाधीश ने बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंदों तक संवैधानिक अधिकारों तथा योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया।

लोक अदालत में सड़क दुर्घटना और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में भी भुगतान कराया गया। एक सड़क दुर्घटना मामले में माया प्रसाद को 1 करोड़ 41 लाख 33 हजार 932 रुपये और दूसरे मामले में इमरान अंसारी को 93 लाख 24 हजार 295 रुपये का मुआवजा मिला। भूमि अधिग्रहण के एक मामले में पप्पू पासवान को 2 करोड़ 9 लाख 42 हजार 211 रुपये का भुगतान कराया गया।

अन्य मामलों में हिमांशु गौतम को 10 लाख 23 हजार 443 रुपये दिए गए। इसके अतिरिक्त 84 लोगों को कुल 4 करोड़ 20 लाख रुपये और 122 लोगों को 1 करोड़ 83 लाख रुपये का भुगतान किया गया। दो दिव्यांग लाभुकों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए, जबकि 19 प्रभावित लोगों को कुल 8 लाख 32 हजार 848 रुपये की सहायता दी गई।

कार्यक्रम में न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बीसीसीएल, एनएचएआई, सिंफर, आईआईटी-आईएसएम तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में सहयोग के लिए कई संस्थानों को सम्मानित भी किया गया। लोक अदालत का उद्देश्य लंबित तथा समझौते योग्य मामलों का समाधान कर पात्र लोगों तक राहत पहुंचाना रहा।