धनबाद शहर में डीजे या लाउडस्पीकर बजाने के लिए नगर निगम की लिखित अनुमति लेनी होगी। नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी नगर निकायों को झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 में शामिल ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के प्रावधानों और संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन कराने का निर्देश दिया है।
विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार की ओर से नगर आयुक्तों, अपर नगर आयुक्तों, उप नगर आयुक्तों और कार्यपालक पदाधिकारियों को जारी पत्र में कहा गया है कि अधिनियम में ध्वनि प्रदूषण रोकने के प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा। अब नगर निकायों को इन नियमों के आधार पर अपने क्षेत्रों में कार्रवाई करनी है।
निर्देश के मुताबिक, सार्वजनिक शांति भंग करने या ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा समूह पर पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी की लिखित अनुमति के बिना लाउडस्पीकर बजाने पर दो हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों के बारे में इस आदेश में अलग से स्पष्ट व्यवस्था का उल्लेख नहीं है। हालांकि, उपलब्ध विवरण के अनुसार झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम लाउडस्पीकर और डीजे के इस्तेमाल के लिए अनुमति लेना जरूरी बताते हैं। ऐसे में आयोजन से पहले संबंधित निकाय से नियम और अनुमति की प्रक्रिया की जानकारी लेना आवश्यक होगा।
नगर निकायों को उपायुक्त के दिशा-निर्देश में तीन महीने के भीतर अपने क्षेत्र के साइलेंस जोन चिह्नित करने को भी कहा गया है। धनबाद नगर निगम को औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय क्षेत्रों के साथ साइलेंस जोन निर्धारित करना होगा। प्रत्येक जोन में पहचान संबंधी साइन बोर्ड और वहां स्वीकार्य ध्वनि स्तर की जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी।
विभाग ने अपने निर्देश में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा 6 मई 2026 को जारी एसओपी का हवाला दिया है। उपायुक्त को अपने अधिकार क्षेत्र में इसके क्रियान्वयन की निगरानी करनी है। नए निर्देशों के बाद धनबाद में सार्वजनिक आयोजनों तथा अन्य अवसरों पर डीजे और लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने वालों को नगर निगम की अनुमति संबंधी प्रक्रिया का पालन करना होगा।