झारखंड में लंबे समय से गैरहाजिर 695 डॉक्टर चिह्नित, 631 की सेवा समाप्ति की तैयारी

स्वास्थ्य विभाग ने जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर लंबे समय से ड्यूटी से दूर 695 चिकित्सकों की पहचान की है। इनमें 631 से सेवा में होने का प्रमाण और 64 से अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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रांची में झारखंड स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सांकेतिक दृश्य

रांची में झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए 695 चिकित्सकों के मामलों में कार्रवाई शुरू की है। विभाग की ओर से चिकित्सकों की वरीयता सूची जारी करने के बाद सभी जिलों से मंगाई गई रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई। चिह्नित डॉक्टरों की नियुक्तियां अलग-अलग समय पर झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से हुई थीं।

जिलों की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 631 चिकित्सक फिलहाल कार्यरत नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर यह प्रमाण देने को कहा है कि वे वर्तमान में सरकारी सेवा दे रहे हैं। तय अवधि में साक्ष्य के साथ दावा प्रस्तुत नहीं होने पर उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

इन 631 मामलों में अंतिम निर्णय तत्काल नहीं होगा। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सेवा समाप्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग का अनुमोदन और राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति भी ली जाएगी। इस तरह नोटिस का जवाब मिलने और निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही कार्रवाई अंतिम चरण तक पहुंचेगी।

विभाग ने अलग से 64 ऐसे चिकित्सकों की पहचान की है जो सेवा में बने हुए हैं, लेकिन लंबे समय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित बताए गए हैं। इन डॉक्टरों को भी 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। उनसे पूछा गया है कि उनकी अनुपस्थिति को लेकर अनुशासनिक कार्रवाई क्यों न की जाए।

विभागीय जानकारी में सरकारी नियुक्ति के बाद योगदान न देने अथवा योगदान देकर ड्यूटी से दूर रहने को पुरानी समस्या बताया गया है। कुछ मामलों में पसंद के स्थान पर पदस्थापन नहीं मिलने के बाद चिकित्सकों के काम पर नहीं आने की स्थिति का उल्लेख किया गया है। सरकार पहले भी ऐसे मामलों की पहचान कर सेवा समाप्ति की कार्रवाई करती रही है, लेकिन इस बार संख्या काफी अधिक है।

राज्य में सरकारी चिकित्सकों की कमी के बीच विभाग नियुक्ति के दूसरे विकल्पों पर भी काम कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टेंडर के जरिये अनुबंध पर डॉक्टरों की नियुक्ति में अधिकतम तीन लाख रुपये वेतन और उनके विकल्प के आधार पर पदस्थापन की व्यवस्था अपनाई जा रही है। इसके साथ ही चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए दक्षिणी राज्यों से नियुक्ति की तैयारी का भी उल्लेख किया गया है।