झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है। कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग के साथ हुई वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है। संघ का कहना है कि सेवा सुरक्षा, वेतन भुगतान और श्रम सुविधाओं समेत छह मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी के अनुसार, 22 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ बैठक हुई थी। इसमें कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और एंबुलेंस संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। सरकार की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय मांगे जाने के बाद संघ ने फिलहाल आंदोलन रोकने का फैसला किया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मनमाने ढंग से सेवा समाप्त किए जाने पर रोक शामिल है। संघ के दावे के मुताबिक, किसी शिकायत या गड़बड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्यस्तरीय टीम, संबंधित जिले के सिविल सर्जन और कर्मचारी संघ की भागीदारी से जांच कराने पर सहमति बनी है। दोष प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है।
वेतन भुगतान को पारदर्शी बनाने के लिए एस्क्रो खाते की व्यवस्था पर भी सहमति बनने का दावा किया गया है, ताकि स्वास्थ्य विभाग भुगतान की निगरानी कर सके। संघ ने कहा है कि एंबुलेंस खराब होने या कोई केस नहीं मिलने जैसी स्थिति में कर्मचारियों के वेतन से कटौती नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ये परिस्थितियां उनके नियंत्रण में नहीं होतीं।
वार्ता में समय पर वेतन, न्यूनतम मजदूरी, ईपीएफ, ईएसआईसी, अवकाश, जीवन बीमा और बोनस जैसी सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। सभी एंबुलेंस में बायोमीट्रिक उपकरण लगाने तथा नए कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अनुमति लेने की मांग भी उठाई गई। मौजूदा टेंडर में संशोधन या निर्धारित प्रक्रिया से नया टेंडर जारी करने के विकल्प पर भी विचार हुआ।
संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन स्थगित करने का अर्थ मांगों को वापस लेना नहीं है। उसके अनुसार, किसी कर्मचारी के खिलाफ अनुचित कार्रवाई होने पर 72 घंटे के भीतर आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही 18 नवंबर 2026 तक संतोषजनक समाधान नहीं मिलने पर राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। ऐसी स्थिति में आपातकालीन एंबुलेंस सेवा प्रभावित होने की आशंका रहेगी।