धनबाद में साइबर अपराध से बचाव के लिए चल रहे जागरूकता अभियान से आईआईटी-आईएसएम और भारत सरकार का दूरसंचार विभाग भी जुड़ गया है। संस्थान के 13 छात्रों को विशेष प्रशिक्षण देकर ‘साइबर साथी’ बनाया गया है। ये छात्र जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में नागरिकों से संवाद करेंगे और उन्हें डिजिटल माध्यमों से होने वाली ठगी के प्रति सावधान करेंगे।
ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने शुक्रवार को बताया कि प्रशिक्षित छात्र अगले एक वर्ष तक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियां चलाएंगे। प्रशिक्षण धनबाद पुलिस और दूरसंचार विभाग की ओर से दिया गया है। अभियान का उद्देश्य साइबर अपराध के तौर-तरीकों और उनसे सुरक्षित रहने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
साइबर साथी नागरिकों को फर्जी फोन कॉल, संदिग्ध लिंक, ओटीपी मांगने और अन्य प्रकार के डिजिटल फ्रॉड के बारे में बताएंगे। वे लोगों को यह समझाने का प्रयास करेंगे कि अनजान व्यक्ति के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने से किस तरह नुकसान हो सकता है। अभियान में शहरी आबादी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक, दूरसंचार विभाग संदिग्ध मोबाइल नंबरों से जुड़ी सूचनाएं धनबाद पुलिस के साथ साझा करेगा। इससे साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले नंबरों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई में सहायता मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान दूरसंचार विभाग के सहायक महानिदेशक नीलेश कुमार सिन्हा, सहायक मंडल पदाधिकारी विशाल शाह और संस्थान के छात्र उपस्थित थे।
ग्रामीण एसपी ने म्यूल बैंक खातों और अवैध सिम कार्ड को वित्तीय साइबर अपराध रोकने की राह में बड़ी चुनौती बताया। पुलिस बैंकों के साथ समन्वय कर संदिग्ध खातों की पहचान और उन्हें फ्रीज कराने की दिशा में काम कर रही है। टेलीकॉम कंपनियों तथा सिम विक्रेताओं को नए सिम जारी करते समय विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश भी दिया गया है।
जागरूकता अभियान के तहत साइबर सुरक्षा पर तैयार पुस्तकें वितरित की जा रही हैं। स्कूलों और कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपाल के माध्यम से भी बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं। अब विद्यार्थियों और दूरसंचार विभाग की भागीदारी से इस अभियान को जिले में लगातार और व्यापक स्तर पर चलाने की तैयारी है।