धनबाद मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में तीनों वेंटिलेटर खराब, सर्जिकल आईसीयू पर बढ़ा दबाव

धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के 220 बेड वाले मेडिसिन विभाग की सीसीयू में तीनों वेंटिलेटर खराब हैं। गंभीर मरीजों को सर्जिकल आईसीयू भेजने या दूसरे अस्पताल जाने की सलाह देने की स्थिति बन रही है।

2 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
झारखंड24 का पूर्ण लोगो—प्रकाशक की लोगो-मात्र छवि के स्थान पर

धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के 220 बेड वाले मेडिसिन विभाग में वेंटिलेटर की उपलब्धता गंभीर चिंता का विषय बन गई है। विभाग की सीसीयू में लगे तीनों वेंटिलेटर खराब बताए गए हैं। इसके कारण सांस, निमोनिया, स्ट्रोक और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जरूरत पड़ने पर इसी विभाग में जीवनरक्षक सुविधा नहीं मिल पा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, बस्ताकोला निवासी 76 वर्षीय ईश्वर लाल 28 अगस्त से एशियन जालान अस्पताल में भर्ती थे और गंभीर स्थिति के कारण वेंटिलेटर पर थे। हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन मंगलवार को उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाए। मेडिसिन विभाग में वेंटिलेटर नहीं मिलने के बाद काफी प्रयास से उन्हें सर्जिकल आईसीयू में यह सुविधा उपलब्ध कराई गई।

मेडिसिन विभाग में आने वाले अन्य गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सर्जिकल आईसीयू में स्थानांतरित किया जाता है। वहां जगह या उपकरण उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कुछ मरीजों को दूसरे अस्पताल जाने की सलाह भी दी जा रही है। इससे परिजनों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ने की बात सामने आई है।

सर्जिकल आईसीयू में छह वेंटिलेटर हैं। सामान्य तौर पर वहां ऑपरेशन के बाद सर्जरी और ऑर्थोपेडिक मरीजों के साथ आपात स्थिति में पहुंचे गंभीर घायलों को रखा जाता है। मेडिसिन विभाग के मरीज भी इसी आईसीयू में भेजे जाने से उपलब्ध बेड और वेंटिलेटर पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक इसका असर उपचार व्यवस्था पर पड़ रहा है।

अस्पताल अधीक्षक डीके गिंदोरिया ने बताया कि खराब पड़े पुराने वेंटिलेटरों की मरम्मत संभव नहीं है। मेडिसिन विभाग के लिए नए वेंटिलेटर खरीदने की स्वीकृति मुख्यालय से मिल चुकी है। अब विभागाध्यक्ष को प्रस्ताव देकर टेंडर प्रक्रिया शुरू करानी है। अधीक्षक के अनुसार, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग को नए वेंटिलेटर उपलब्ध कराए जाएंगे।