धनबाद सीएमपीएफओ में 3.64 करोड़ रुपये के कथित पेंशन घोटाले की सीबीआई जांच शुरू

सीबीआई ने सीएमपीएफओ के चार कर्मचारियों समेत अन्य आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायत में 142 कथित फर्जी दावों के जरिए 3.64 करोड़ रुपये के भुगतान का आरोप है।

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धनबाद सीएमपीएफओ के कथित पेंशन घोटाले की सीबीआई जांच से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

धनबाद स्थित कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (सीएमपीएफओ) में पेंशन भुगतान से जुड़े कथित घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने शुरू कर दी है। संस्थान के मुख्य सतर्कता अधिकारी की शिकायत पर चार कर्मचारियों समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में सरकारी धन के दुरुपयोग और रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप लगाए गए हैं।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामला मार्च 2016 से सितंबर 2016 के बीच निपटाए गए 142 पेंशन दावों से संबंधित है। आरोप है कि डीलिंग असिस्टेंट के रूप में काम कर रहे कर्मचारियों ने निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए कथित फर्जी दावों को आगे बढ़ाया। इन दावों के आधार पर मासिक पेंशन और बकाया राशि के रूप में कुल 3,64,48,052 रुपये का अनुचित भुगतान होने की बात शिकायत में कही गई है।

प्राथमिकी में धनबाद कार्यालय के सेक्शन ऑफिसर अचिंत्य कुमार और अजय कुमार सिन्हा के साथ धनबाद के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक मंजीत कुमार को आरोपी बनाया गया है। ओडिशा के तालचेर क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ सेक्शन ऑफिसर दीप कुमार का नाम भी आरोपियों में शामिल है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित कर्मचारियों ने आपसी साजिश के तहत अपने सरकारी पद का दुरुपयोग किया और दस्तावेजों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड में बदलाव कर गलत भुगतान का रास्ता बनाया। ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और प्राथमिकी दर्ज होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।

सीबीआई ने धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली रिकॉर्ड के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसके साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। एजेंसी ने प्राथमिकी के बाद शुरुआती स्तर पर मामले से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है।

जांच का प्रमुख विषय यह होगा कि पेंशन दावों की पुष्टि और भुगतान की प्रक्रिया किन स्तरों से होकर गुजरी तथा कथित अनियमितताओं में किसकी क्या भूमिका रही। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी गिरफ्तारी या अदालत के निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है। आगे की स्थिति सीबीआई की जांच और जुटाए गए दस्तावेजी साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।