पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से बाहर रेल लाइन ले जाने का प्रस्ताव, बेतला नाम से नया स्टेशन भी शामिल

रेलवे विकास निगम ने छिपादोहर-हेहेगड़ा रेलखंड को पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से बाहर ले जाने का प्रस्ताव परिवेश पोर्टल पर दिया है। इस पर पीटीआर की सहमति अभी बाकी है।

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पलामू टाइगर रिजर्व के छिपादोहर-हेहेगड़ा रेलखंड को बाहर ले जाने की प्रस्तावित योजना

लातेहार जिले में पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से गुजरने वाली रेल लाइन का मार्ग बदलने की दिशा में रेलवे विकास निगम ने प्रस्ताव आगे बढ़ाया है। प्रस्ताव भारत सरकार के परिवेश पोर्टल पर अपलोड कर पीटीआर से अनापत्ति मांगी गई है। रिजर्व प्रबंधन फिलहाल इसके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रहा है।

प्रस्ताव के अनुसार, धनबाद रेल मंडल के अंतर्गत छिपादोहर और हेहेगड़ा के बीच मौजूदा रेल मार्ग को रिजर्व के बाहरी हिस्से की ओर ले जाया जाएगा। अभी यह लाइन हाथी और बाघ के कॉरिडोर वाले कोर क्षेत्र से गुजरती है। नया मार्ग बनने पर करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्सा रिजर्व के ‘चिकन नेक’ क्षेत्र से गुजरेगा।

चिकन नेक वाले हिस्से में सुरंग बनाने की योजना है, जिससे तीनों रेल लाइनें गुजारी जाएंगी। सुरंग के लिए अलग प्रस्ताव तैयार किया गया है और निर्माण पीटीआर की सहमति से होना है। मार्ग बदलने पर छिपादोहर और हेहेगड़ा स्टेशनों को समाप्त नहीं किया जाएगा, हालांकि दोनों को लगभग 500 मीटर स्थानांतरित करने की बात प्रस्ताव में है।

दोनों स्टेशनों के बीच अभी करीब 11 किलोमीटर की दूरी है। परिवर्तित मार्ग में यह बढ़कर लगभग 14 किलोमीटर हो सकती है। प्रस्तावित लाइन छिपादोहर से केड़ गांव होते हुए हेहेगड़ा की ओर जाएगी। इसी रेलखंड पर बेतला नेशनल पार्क के नाम से एक नया स्टेशन बनाने का आग्रह रेलवे ने स्वीकार किया है।

पीटीआर के उपनिदेशक प्रजेशकान्त जेना के अनुसार, वैकल्पिक मार्ग का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और उसका अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने इसे वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, मौजूदा लाइन हटने से खाली होने वाला क्षेत्र बाघों के प्रजनन और दूसरे वन्यजीवों के संरक्षण में उपयोगी हो सकता है।

यह विवाद 2021 में सोननगर-पतरातू थर्ड लाइन योजना के बाद शुरू हुआ था। कोर क्षेत्र में तीसरी लाइन पर पीटीआर, पर्यावरण विशेषज्ञों और राज्य वन्यजीव बोर्ड ने आपत्ति जताई थी। बाद में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने मौजूदा दो लाइनों तथा प्रस्तावित लाइन को कोर क्षेत्र से बाहर ले जाने का निर्देश दिया। इसके बाद रेलवे और पीटीआर की संयुक्त टीम ने संभावित वैकल्पिक मार्गों का सर्वे किया था।