रांची के आवासीय इलाकों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ गई हैं। अगस्त और सितंबर के दौरान सांपों के रेस्क्यू के लिए प्रतिदिन औसतन दस फोन आने की जानकारी सामने आई है। लोग आपातकालीन नंबर 112, वन विभाग की हेल्पलाइन और बिरसा मुंडा जू के माध्यम से घरों तथा आसपास सांप दिखाई देने की सूचना दे रहे हैं।
रांची के प्रमंडलीय वन पदाधिकारी श्रीकांत वर्मा के अनुसार, विभाग की हेल्पलाइन पर जानकारी मिलते ही सांप पकड़ने वाली टीम भेजी जाती है। शहरी क्षेत्र में इस काम के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। हालांकि, रांची के आसपास के सभी ग्रामीण इलाकों में हर सूचना पर स्नेक कैचर भेज पाना संभव नहीं हो पाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष इसी अवधि में प्रतिदिन औसतन तीन से पांच फोन आते थे। इस बार यह संख्या बढ़कर दस या उससे अधिक हो गई है। शहर के अशोक नगर और बरियातू की प्रोफेसर कॉलोनी के साथ अपार्टमेंटों में भी सांप मिलने के मामले सामने आए हैं। हाल में महेंद्र सिंह धोनी और आजसू प्रमुख सुदेश महतो के घर सांप निकलने पर भी वन विभाग की टीम पहुंची थी।
सांप बचाने के विशेषज्ञ मणिप्रताप सिंह ने आवासीय क्षेत्रों के विस्तार और बारिश को इसकी वजह बताया है। उनके मुताबिक, रांची के आसपास निर्माण बढ़ने से सांपों का प्राकृतिक आवास घट रहा है। बारिश के कारण पानी भरने पर वे सुरक्षित जगह की तलाश में शहर और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं।
झारखंड में सामान्य तौर पर कोबरा, करैत और रेट स्नेक पाए जाते हैं। इस वर्ष रामगढ़ में पहली बार रसेल वाइपर पकड़े जाने की जानकारी दी गई है, जबकि रांची के आसपास भी एक रसेल वाइपर मिला है। ऐसे मामलों में प्रजाति की सही पहचान और सुरक्षित रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
रेस्क्यू से जुड़े लोगों के अनुसार, एक सकारात्मक बदलाव यह है कि कई नागरिक सांप को मारने के बजाय सहायता मांग रहे हैं। सूचना मिलने के बाद विशेषज्ञ सांप को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ते हैं। लगातार बढ़ रही कॉल संख्या से यह भी स्पष्ट है कि बारिश के मौसम और फैलते शहरी क्षेत्र में वन्यजीवों के साथ ऐसे संपर्क पर अधिक सतर्कता की जरूरत बनी हुई है।