पलामू टाइगर रिजर्व में दो बाघिन और एक बाघ लाने की तैयारी, पहले होगा भौतिक सत्यापन

टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम के तहत मध्य प्रदेश से दो बाघिन और एक बाघ पलामू लाने की योजना है। स्थानांतरण से पहले विशेषज्ञ टीम रिजर्व की सुरक्षा और सुविधाओं की जांच करेगी।

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पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की प्रस्तावित योजना

पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के तहत मध्य प्रदेश के किसी टाइगर रिजर्व से दो बाघिन और एक बाघ को पलामू लाने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने जुलाई में इस कार्यक्रम की अनुमति दी थी।

स्थानांतरण से पहले वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम पलामू टाइगर रिजर्व का भौतिक सत्यापन करेगी। टीम उस स्थान की सुरक्षा व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लेगी, जहां लाए गए बाघों को रखा जाना है। जिस रिजर्व से बाघ लाए जाएंगे, वहां भी निरीक्षण किया जाना है।

योजना के अनुसार, तीनों वन्यजीवों को शुरुआत में पलामू के सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखा जाएगा। करीब एक वर्ष तक उनकी निगरानी करने के बाद उन्हें खुले जंगल में छोड़ने की तैयारी है। स्थानांतरण के समय वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की टीमें मौजूद रहेंगी तथा स्वास्थ्य पर नजर रखेंगी।

रिजर्व में इस कार्यक्रम के लिए आवास और भोजन की उपलब्धता सुधारने के प्रयास किए गए हैं। घास के मैदानों का विस्तार किया गया है और सॉफ्ट रिलीज सेंटर में हिरण तथा चीतल रखे गए हैं। बाघों के आने के बाद रिजर्व के दूसरे हिस्सों में भी चीतल की संख्या बढ़ाने की योजना है।

वन्यजीवों को लाने के लिए एक विशेष वाहन भी तैयार किया गया है। कार्यक्रम की रूपरेखा राजस्थान के सरिस्का और मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अनुभवों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। संबंधित अधिकारियों के मुताबिक, विशेषज्ञों का निरीक्षण पूरा होने के बाद 2026 के अंतिम महीनों तक स्थानांतरण का लक्ष्य रखा गया है।

पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, राज्य में इसी क्षेत्र में बाघों की गतिविधि दर्ज की जा रही है। वर्ष 2021-22 के बाद से सात बाघों की आवाजाही रिकॉर्ड होने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम के माध्यम से झारखंड में 2027 तक बाघों की संख्या दस से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।