साहिबगंज में गंगा कटाव से रेल लाइन को खतरा, बरहड़वा-साहिबगंज खंड पर दूसरे दिन भी परिचालन बंद

सकरीगली और महाराजपुर के बीच गंगा का कटाव रेल लाइन के करीब पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर परिचालन रोककर करीब 300 मजदूरों से कटावरोधी काम कराया जा रहा है।

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साहिबगंज में गंगा कटाव से रेल लाइन को बचाने के लिए बोल्डर डालते मजदूर

साहिबगंज जिले में सकरीगली और महाराजपुर के बीच गंगा नदी के कटाव से बरहड़वा-साहिबगंज रेल खंड पर संकट बना हुआ है। सुरक्षा को देखते हुए मंगलवार को रोका गया रेल परिचालन बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी ठप रहा। रेलवे प्रशासन ने प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करने के लिए कटावरोधी काम तेज कर दिया है।

रेलवे प्रशासन के अनुसार, नदी का कटाव लगभग 300 मीटर लंबे क्षेत्र में हो रहा है और करीब 160 मीटर हिस्से की स्थिति गंभीर बताई गई है। कटाव और रेलवे लाइन के बीच अब लगभग 10 मीटर की दूरी बची है। हालांकि रेल पटरी फिलहाल दुरुस्त बताई गई है, लेकिन संभावित जोखिम के कारण इस मार्ग पर लोकल ट्रेनों का संचालन रोका गया है।

करीब 300 मजदूर दिन और रात की अलग-अलग पालियों में काम कर रहे हैं। पानी में बोल्डर डालकर उन्हें तार की जाली में समेटते हुए नदी किनारे बैठाया जा रहा है। रेल वैगन से भी बोल्डर पहुंचाए जा रहे हैं। प्रशासन का अनुमान है कि काम के लिए लगभग 150 वैगन बोल्डर की आवश्यकता होगी, जिनमें करीब 100 वैगन मौके पर पहुंच चुके हैं।

विशेषज्ञ मजदूर अररिया और किशनगंज से बुलाए गए हैं, जबकि जाली तैयार करने के लिए तार कोलकाता से मंगाया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इसी स्थान पर वर्ष 2013 में भी कटाव हुआ था। इस बार पहले लगाए गए बोल्डर के नीचे की मिट्टी बहने से जाली समेत बोल्डर धंस गए हैं। नदी की धारा बीच-बीच में कटावरोधी संरचना से टकरा रही है।

मालदा डिवीजन के एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य घटनास्थल पर कैंप कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने भी सहयोग शुरू किया है। साहिबगंज सदर के अंचल अधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने स्थल का जायजा लिया और रात के काम के लिए छह गोताखोरों की ड्यूटी लगाई गई है। जेटी की व्यवस्था किए जाने की भी बात कही गई है।

कार्यस्थल पर एक चिकित्सक, नर्स और ड्रेसर वाली मेडिकल टीम के साथ जरूरी दवाएं रखी गई हैं तथा रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है। रेलवे का कहना है कि कटाव रोकने का काम युद्धस्तर पर जारी है। पानी घटने के बाद ही नुकसान और तट की वास्तविक स्थिति का पूरा आकलन हो सकेगा।