पलामू जिले में पुलिस ने घरेलू और पारिवारिक विवादों में समझौते के बाद पीड़ितों की स्थिति की निगरानी के लिए घर-घर सत्यापन शुरू किया है। अभियान का उद्देश्य यह पता लगाना है कि थाने में बनी सहमति का पालन हो रहा है या नहीं और संबंधित महिला, बुजुर्ग अथवा बच्चा दोबारा उत्पीड़न का सामना तो नहीं कर रहा। पुलिस पिछले दो महीने से इस व्यवस्था पर काम कर रही है।
पुलिस के अनुसार, अब तक 170 से अधिक मामलों और शिकायतों का भौतिक सत्यापन किया जा चुका है। छतरपुर पुलिस अनुमंडल में सर्वाधिक 38 मामलों में अधिकारियों ने पीड़ितों के घर पहुंचकर उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। अभी तक हुए सत्यापन में समझौते के बाद किसी पीड़ित की ओर से कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आने की बात कही गई है।
जिले के सभी थानों में महिलाओं और बुजुर्गों से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग रजिस्टर खोला गया है। इसमें शिकायत, समझौते और आगे की स्थिति का विवरण दर्ज किया जा रहा है। सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व वाली टीम को दी गई है, जिसमें थाना प्रभारी और अन्य पुलिस अधिकारी भी शामिल रहते हैं।
मेदिनीनगर टाउन, हुसैनाबाद और छतरपुर के महिला थानों में महिलाओं से जुड़े मामलों में आपसी समझौते होते हैं, जबकि सामान्य थानों में बुजुर्गों और पारिवारिक विवादों की शिकायतें भी पहुंचती हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गंभीर शिकायतों में कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। महिला अपराध से जुड़े मुकदमों का संवेदनशीलता के साथ अनुसंधान करने का निर्देश भी दिया गया है।
पलामू के 27 प्रशासनिक थानों के लिए इस विषय पर मानक कार्यप्रणाली जारी की गई है और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। पुलिस प्रत्येक महीने थानों में आई ऐसी शिकायतों की समीक्षा करने के साथ पीड़ितों के घर जाकर उनकी स्थिति का आकलन कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल का केंद्र समझौते के बाद नियमित प्रतिक्रिया लेना और घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाना है।