पश्चिमी सिंहभूम जिले के दो ‘हो’ आदिवासी बहुल गांवों ने नशे की बिक्री और सेवन पर अंकुश लगाने के लिए ग्राम सभा के स्तर पर सख्त नियम लागू किए हैं। चाईबासा सदर प्रखंड के बाईहातू और खूंटपानी प्रखंड के बानाबिज गांव में शराब तथा गांजा बेचने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना तय किया गया है। नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों पर 10 हजार रुपये का दंड लगाने का निर्णय भी लिया गया है।
नरसंडा पंचायत के बाईहातू गांव की ग्राम सभा ने 29 सितंबर को सर्वसम्मति से ये नियम बनाए थे। इसके तहत समूह में बैठकर अड्डेबाजी करने वालों के लिए भी 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाने के साथ गांव में सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण बनाना है।
बाईहातू निवासी सामू पूर्ति के मुताबिक, फैसले के बाद गांव में चोरी-छिपे शराब बेचने की गतिविधि बंद हुई है। निगरानी के लिए युवाओं की एक टीम सक्रिय है। उन्होंने बताया कि 29 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच नशे की हालत में मिले एक युवक से ग्राम सभा में 10 हजार रुपये जुर्माना जमा कराया गया।
बाईहातू की पहल से प्रभावित होकर बानाबिज की ग्राम सभा ने 13 अक्टूबर को ऐसे नियम लागू करने का फैसला किया। बड़ा गुंटिया पंचायत के मुखिया हरिचरण हेंब्रम के अनुसार, नशीले पदार्थों का बढ़ता इस्तेमाल युवाओं के भविष्य के साथ पारिवारिक जीवन, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। इन्हीं चिंताओं को देखते हुए खरीद-बिक्री और सेवन पर सख्ती की गई है।
मुफस्सिल थाना प्रभारी बिनोद कुमार ने बताया कि ग्राम सभा के सहयोग से नशे पर रोक की कवायद सबसे पहले जोजोहातू गांव में शुरू हुई थी। इसके बाद दूसरे गांव भी प्रेरित हुए। उनके अनुसार, जोजोहातू, बाईहातू और बानाबिज में शांति है तथा महुआ शराब बनना बंद हुआ है। दुर्गा पूजा के बाद अन्य गांवों के प्रमुखों के साथ बैठक कर अभियान के विस्तार की तैयारी है।
ग्राम सभाओं ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियम भी बनाए हैं। शाम सात बजे के बाद बच्चों के अनावश्यक रूप से बाहर घूमने पर अभिभावकों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। नियमों की सूचना देने के लिए गांवों के प्रवेश मार्गों पर बोर्ड लगाए गए हैं। बाहरी व्यक्ति के शराब या गांजा बेचने पर पुलिस से शिकायत करने का निर्णय भी लिया गया है।