मेदिनीनगर में शुक्रवार को 108 एंबुलेंसकर्मियों की हड़ताल के दौरान सरकारी एंबुलेंस, ममता वाहन और अन्य उपलब्ध वाहनों के सहारे मरीजों के परिवहन की व्यवस्था जारी रखी गई। पांच महीने के बकाया वेतन के भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर राज्यभर के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। पलामू जिले के 100 से अधिक कर्मी भी इसमें शामिल हुए।
हड़ताल में शामिल पलामू के कर्मचारी रांची पहुंचे, जहां उनकी मांगों और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। कर्मियों का कहना है कि बैठक के बाद ही आंदोलन के अगले कदम पर निर्णय लिया जाएगा। उनकी प्रमुख मांगों में लंबित वेतन का भुगतान शामिल है।
पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, जिले में पिछले छह महीने से 108 एंबुलेंस और उसके कर्मियों की सेवा नहीं ली जा रही है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सरकारी एंबुलेंस का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी व्यवस्था के कारण हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में कोई विशेष कठिनाई सामने नहीं आई।
108 एंबुलेंस सेवा के झारखंड राज्य निदेशक सुमित ने भी बताया कि हड़ताल का कोई खास असर नहीं पड़ा। उनके मुताबिक ममता वाहन, सरकारी गाड़ियां और कई निजी वाहन समन्वय के साथ उपलब्ध रखे गए थे, ताकि जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा सके।
पलामू में सेवा से जुड़े विजय सिंह के अनुसार, सामान्य दिनों में 108 सेवा के लिए पांच से छह कॉल आते हैं। शुक्रवार शाम पांच बजे तक कोई कॉल नहीं आया था। उन्होंने कहा कि कॉल आने की स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम पहले से तैयार थे।
हड़ताल में शामिल कर्मी ललन चौधरी ने बताया कि जिले के सभी कर्मचारी रांची में हुए सामूहिक जुटान में पहुंचे थे। वहां बैठक और चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जानी थी। इस बीच जिला स्तर पर अधिकारियों ने उपलब्ध वाहनों के माध्यम से मरीज परिवहन की व्यवस्था सामान्य बनाए रखने की बात कही है।