धनबाद में 108 एंबुलेंस सेवा ठप, मरीजों को निजी साधनों से पहुंचना पड़ा अस्पताल

पांच माह के बकाया वेतन समेत विभिन्न मांगों को लेकर चालक और ईएमटी आंदोलन पर हैं। शुक्रवार को सेवा बंद रहने से मरीजों और परिजनों को परेशानी हुई।

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धनबाद जिले में शुक्रवार को 108 एंबुलेंस सेवा ठप रहने से मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल पहुंचने के लिए ऑटो तथा निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा। राज्यभर के एंबुलेंस कर्मचारी रांची में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने गए थे। जिले में कर्मियों की अनुपलब्धता के कारण निशुल्क आपातकालीन परिवहन सेवा पूरे दिन प्रभावित रही।

टुंडी निवासी शंकर तुरी की मां की तबीयत शुक्रवार सुबह अचानक बिगड़ गई। उन्होंने 108 सेवा से कई बार संपर्क किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिवार ने 600 रुपये में ऑटो बुक किया और वृद्धा को शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया। वहां उन्हें इमरजेंसी विभाग में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।

सेवा बंद होने से दूसरे मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कुछ परिवारों ने ऑटो लिया तो कुछ ने पैसे का इंतजाम कर निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की। एसएनएमएमसीएच से रांची के रिम्स रेफर किए गए कई मरीज आर्थिक कठिनाई के कारण आगे नहीं जा सके। इसका अधिक असर सीमित आय वाले परिवारों पर पड़ा।

108 एंबुलेंस के चालक और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन पांच माह के बकाया वेतन के भुगतान सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मियों का आरोप है कि संचालन से जुड़ी एजेंसी से भुगतान के संबंध में केवल आश्वासन मिला है। उन्होंने दुर्गापूजा के समय वेतन नहीं मिलने से परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा होने की बात भी कही है।

कर्मचारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने 25 मई को एजेंसी का करार समाप्त कर सिविल सर्जन को एंबुलेंस का प्रभार लेने का निर्देश दिया था, लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ। संघ ने संचालन और वेतन भुगतान की जिम्मेदारी सीधे सरकार को देने, हटाए गए कर्मियों को वापस रखने तथा ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन जैसी सुविधाएं देने की मांग रखी है।

रांची में स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई वार्ता सफल नहीं होने के बाद कर्मचारियों ने 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है। कर्मियों ने बकाया वेतन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। प्रस्तावित हड़ताल शुरू होने पर धनबाद सहित राज्य की आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था पर आगे भी असर पड़ सकता है।