चाईबासा में जिला कौशल समिति की समीक्षा बैठक के दौरान कौशल प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। जिला समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्लेसमेंट की स्थिति और आवासीय केंद्रों की व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के तहत जिले के तीन कौशल विकास केंद्रों में 10 बैच चल रहे हैं। झारखंड कौशल विकास योजना के अंतर्गत चार केंद्रों पर सात बैच संचालित किए जा रहे हैं। बिरसा कौशल विकास केंद्र के तहत 14 केंद्रों में कुल 12 बैच चलने की जानकारी भी दी गई।
उपायुक्त ने संबंधित संस्थाओं से कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को बाजार की जरूरत के अनुरूप दक्ष बनाना और उसके बाद उन्हें आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। इसके लिए केंद्रों और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय के साथ लगातार प्रयास करने पर बल दिया गया।
समीक्षा के दौरान डीडीयू-जीकेवाई और झारखंड कौशल विकास योजना के तहत उपलब्ध आवासीय प्रशिक्षण सुविधा पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने आवासीय केंद्रों में सुरक्षा, भोजन, स्वच्छता, प्रशिक्षण संचालन और अन्य आधारभूत सुविधाओं की जानकारी ली तथा प्रशिक्षणार्थियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने को कहा।
सभी आवासीय कौशल विकास केंद्रों में प्रशिक्षणार्थियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में यह बात रखी गई कि स्वास्थ्य की नियमित निगरानी से समस्याओं की समय पर पहचान और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बैठक में जिला कौशल विकास पदाधिकारी अविनाश ठाकुर, चाईबासा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और जिले में संचालित विभिन्न कौशल विकास केंद्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समीक्षा का केंद्र प्रशिक्षण के साथ-साथ प्लेसमेंट, आवासीय सुविधा और प्रशिक्षणार्थियों की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाना रहा।