सरैयाहाट में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं परती जमीन पर कर रहीं खेती

दुमका के सरैयाहाट प्रखंड में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं प्रशिक्षण, ऋण और तकनीकी सहयोग की मदद से परती भूमि पर सब्जियों तथा दूसरी फसलों की खेती कर आय बढ़ा रही हैं।

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दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं परती जमीन को खेती योग्य बनाकर आजीविका का नया आधार तैयार कर रही हैं। महिलाएं सब्जियों और अन्य फसलों का उत्पादन कर स्थानीय बाजारों में बेच रही हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिल रही है और परिवार की आर्थिक जरूरतों में उनकी भागीदारी बढ़ी है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रखंड में करीब 1,500 स्वयं सहायता समूहों से 20,325 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से लगभग छह हजार महिलाओं को करीब 30 एकड़ भूमि पर सब्जियों और दूसरी फसलों की जैविक खेती से जीविका का आधार मिल रहा है। जिन खेतों का पहले पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा था, वहां अब फसलें तैयार की जा रही हैं।

इस पहल में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की ओर से समूहों को ऋण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं ने सामूहिक प्रयास के साथ खेती शुरू की। तैयार उपज की स्थानीय बाजारों में बिक्री से मिलने वाली राशि उनके परिवारों के लिए आय का अतिरिक्त साधन बनी है।

खेती से हुई कमाई का इस्तेमाल कई परिवार बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत, कृषि उपकरणों की खरीद और जरूरी घरेलू कामों में कर रहे हैं। महिलाओं के मुताबिक समूह व्यवस्था के कारण उन्हें अपने श्रम का सीधा आर्थिक लाभ मिलने लगा है और वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में पहले से अधिक सहयोग कर पा रही हैं।

चरकापाथर पंचायत के ककनियां गांव सहित खेती वाले क्षेत्रों में समन्वयक महिला किसानों को पौधों की देखभाल, सिंचाई, छंटाई तथा कीट और रोग नियंत्रण की जानकारी दे रहे हैं। कम लागत में बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। खेतों का नियमित भ्रमण कर फसल से जुड़ी व्यावहारिक सहायता दी जा रही है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य खाली जमीन का उपयोग करने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए नियमित और टिकाऊ आय का माध्यम विकसित करना है। स्वयं सहायता समूह, वित्तीय सहयोग और खेती संबंधी मार्गदर्शन का मेल सरैयाहाट की महिलाओं को उत्पादन तथा बाजार से जोड़ रहा है। इससे अनुपयोगी भूमि के इस्तेमाल और महिला-केंद्रित ग्रामीण आजीविका, दोनों को बढ़ावा मिला है।