पाकुड़ जिले में एंबुलेंस की कमी से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। जिले को उपलब्ध कराई गई 13 एंबुलेंस में से कर्मचारी संघ के अनुसार केवल तीन वाहन चल रहे हैं। आपात स्थिति में समय पर सेवा नहीं मिलने के कारण कई परिवारों को मरीजों को निजी वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पाकुड़ सदर अस्पताल, महेशपुर और पाकुड़िया में एक-एक एंबुलेंस संचालित है, जबकि कई खराब वाहन अलग-अलग गैराज में मरम्मत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बताया गया है कि धन की कमी के कारण उनकी मरम्मत नहीं हो सकी है। वाहनों की सीमित उपलब्धता का असर 108 नंबर पर सहायता मांगने वाले मरीजों पर भी पड़ रहा है।
हालांकि, जिले में सक्रिय एंबुलेंस की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कर्मचारी संघ ने तीन वाहन चलने की बात कही है, जबकि सिविल सर्जन परवीन कुमार संथालिया के अनुसार चार एंबुलेंस से मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खराब वाहनों की मरम्मत के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ की पाकुड़ इकाई ने संचालन व्यवस्था को लेकर भी कई आरोप लगाए हैं। संघ का दावा है कि चालकों और उपचालकों से 12 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन भुगतान आठ घंटे के आधार पर होता है। कर्मचारियों ने समय पर मानदेय और स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया है। इन दावों पर संचालन संस्था का पक्ष उपलब्ध विवरण में नहीं है।
अपनी मांगों को लेकर कर्मचारियों ने नौ अक्टूबर को काला बिल्ला लगाकर विरोध किया था। संघ के अनुसार, रांची में स्वास्थ्य मंत्री के साथ वार्ता के बाद चालकों और उपचालकों के बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया गया, लेकिन बाकी मांगें अब भी लंबित हैं।
संघ के जिला अध्यक्ष सुजीत मंडल ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर कर्मचारी 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। ऐसी स्थिति में पहले से सीमित एंबुलेंस सेवा पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। सिविल सर्जन ने कहा है कि उपलब्ध संसाधनों के बीच मरीजों को बेहतर सेवा देने का प्रयास किया जा रहा है।