पाकुड़ में करम पर्व पर निकली शोभायात्रा, पारंपरिक नृत्य और अनुष्ठानों में जुटे लोग

पाकुड़ के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में करम पर्व पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। शोभायात्रा, करम डाल की पूजा और मांदर की थाप पर नृत्य-गान में सैकड़ों लोग शामिल हुए।

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पाकुड़ जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रविवार को करम पर्व पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। भुईंया-घटवार आदिम जनजाति समाज और भुईंया समाज सामाजिक संगठन की ओर से निकाली गई शोभायात्रा में जिले के अलग-अलग प्रखंडों के साथ अन्य जिलों से आए सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। आयोजन में समुदाय की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की झलक दिखाई दी।

शहरकोल, गोकुलपुर, अलीगंज, बलियाडांगा और आसपास के इलाकों में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। युवतियों और महिलाओं ने आंगन तथा अखाड़ों में करम डाल स्थापित कर पूजा-अर्चना की। आयोजन में राजमहल सांसद विजय हांसदा सहित समाज के प्रतिनिधि और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।

पर्व की परंपरा के तहत कुमारी और नवविवाहिता बहनों ने नदी-तालाब में स्नान के बाद बालू-मिट्टी लाकर नई बांस की टोकरी में जवा तैयार किया। इसमें गेहूं, जौ, मकई, कच्चा धान, चना और तीसी समेत सात से नौ प्रकार के अनाज रखे गए। इसके बाद सुबह और शाम पारंपरिक झूमर गीतों के माध्यम से भाइयों के स्वास्थ्य, दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई।

कथाव्यास भोक्ता सुकुमार राय ने उपस्थित लोगों को करमदेव से जुड़ी परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं की जानकारी दी। बेहतर फसल की कामना के साथ रात में नगाड़ा, मांदर और झुमझूमर की थाप पर पारंपरिक नृत्य-गान भी हुआ। आयोजकों के अनुसार, करम पर्व प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा उत्सव है।

पर्व के अगले चरण में करम डाली को निकटवर्ती जलस्रोतों में विसर्जित करने की परंपरा बताई गई। भाई के स्वागत, तिलक, रक्षा-सूत्र बांधने और पारण के साथ अनुष्ठान पूरा होना है। आयोजन की व्यवस्था में सामाजिक संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भूमिका निभाई, जबकि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए थे।