पाकुड़ जिले में टीबी की रोकथाम और मरीजों की पहचान के लिए व्यापक जागरूकता एवं उन्मूलन अभियान शुरू किया गया है। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पीरामल फाउंडेशन की संयुक्त पहल के तहत उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने जागरूकता रथ को रवाना किया। यह वाहन तय कार्यक्रम के अनुसार जिले के सभी प्रखंडों में पहुंचेगा।
अभियान के दौरान लोगों को टीबी की जांच, संक्रमण से बचाव और उपचार से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। रथ के माध्यम से मरीजों को डॉट्स पद्धति के तहत दी जाने वाली दवाओं का निर्धारित कोर्स पूरा करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा, ताकि इलाज बीच में न छूटे।
जिला स्तर के अधिकारी टीबी मरीजों को छह महीने के लिए गोद लेंगे। इस अवधि में संबंधित अधिकारी मरीजों के बेहतर खान-पान में सहयोग करेंगे और उनके लिए पोषण किट की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। अभियान में इलाज के साथ पर्याप्त पोषण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
सिविल सर्जन डॉ. प्रवीण कुमार संथालिया के अनुसार, विशेष अभियान में तीन प्रखंडों के हर गांव को शामिल करने की योजना है। घर-घर जाकर आवश्यक आंकड़े जुटाने के लिए दो वाहनों में विशेष टीमें बनाई गई हैं। इनसे संभावित मरीजों को चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
दीपावली के बाद चिह्नित लोगों का एक्स-रे और नेट टेस्ट कराया जाएगा तथा जरूरत के अनुसार उपचार शुरू होगा। अमड़ापाड़ा, महेशपुर और लिट्टीपाड़ा क्षेत्र में प्रचार वाहन घूमकर ग्रामीणों तक टीबी से जुड़ी जरूरी जानकारी पहुंचाएंगे।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार या वजन घटने जैसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील की है। साथ ही कहा गया है कि इलाज शुरू होने के बाद दवा बीच में नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से बीमारी गंभीर हो सकती है।