फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से एमबीबीएस दाखिले की जांच में रिम्स रांची का भी संदर्भ

आर्थिक अपराध इकाई की जांच में फर्जी दिव्यांगता और जाति प्रमाणपत्रों के जरिए मेडिकल कॉलेजों की आरक्षित सीटें हासिल करने वाले कथित अंतरराज्यीय गिरोह की जानकारी सामने आई है।

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रांची स्थित रिम्स के एमबीबीएस दाखिलों से जुड़े मामले की प्रतीकात्मक तस्वीर

नीट यूजी में कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी मेडिकल कॉलेजों की आरक्षित सीटें दिलाने के मामले में झारखंड का संदर्भ भी सामने आया है। आर्थिक अपराध इकाई की जांच रिपोर्ट में रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान के वर्ष 2025 के एमबीबीएस दाखिलों से जुड़ी शिकायत का उल्लेख किया गया है। झारखंड में इस पहलू की जांच सीआईडी द्वारा किए जाने की बात कही गई है।

जांच के अनुसार, कथित अंतरराज्यीय गिरोह सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए दिव्यांगता और जाति से जुड़े जाली प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करता था। आरोप है कि दिव्यांग अभ्यर्थी के लिए मिलने वाली स्क्राइब सुविधा की आड़ में परीक्षा में दूसरे व्यक्ति को बैठाया जाता था। बाद में काउंसलिंग के दौरान दिव्यांग कोटे की आरक्षित सीट हासिल करने की कोशिश होती थी।

मामले में पटना से मेडिकल छात्र डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि उससे पूछताछ और बरामद दस्तावेजों के आधार पर कथित व्यवस्था की परतें खुलीं। उसके बयान के अनुसार, वर्ष 2025 में झारखंड के एक मेडिकल कॉलेज में भी फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर दाखिले कराए गए थे।

जांच के दौरान पटना के जकरियापुर स्थित एक अपार्टमेंट से कई संदिग्ध दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। इनमें अधीक्षक और नेत्र रोग विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर-मुहर वाले पांच स्क्राइब प्रमाणपत्र बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रपत्रों में अभ्यर्थियों का विवरण दर्ज था, लेकिन सक्षम अधिकारी से सत्यापन वाला हिस्सा खाली मिला। प्रमाणपत्र असली हैं या फर्जी, इसकी जांच अभी जारी है।

रिपोर्ट में आंख और कान से जुड़ी दिव्यांगता के प्रमाणपत्रों के कथित इस्तेमाल का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी के समक्ष दिए गए बयान के अनुसार, इन स्थितियों का तत्काल भौतिक सत्यापन जटिल होने के कारण उन्हें चुना जाता था। पूर्णिया के सरकारी मेडिकल कॉलेज में फर्जी प्रमाणपत्र से दिव्यांग कोटे में प्रवेश लेने के आरोप में सात छात्रों को निष्कासित किए जाने की जानकारी भी दी गई है।

रिम्स रांची से जुड़े दाखिलों के बारे में उपलब्ध विवरण अभी शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। किसी अभ्यर्थी की जिम्मेदारी या संस्थागत भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। संबंधित जांच पूरी होने और संस्थानों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही झारखंड से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति तथा संभावित कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।