हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड की शिलाडीह पंचायत स्थित तुर्कडीहा गांव में आवागमन की बुनियादी सुविधा नहीं होने से स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। गांव के बच्चे नदी पर बने चेक डैम की संकरी दीवार के सहारे दूसरी ओर जाकर विद्यालय पहुंचते हैं। बारिश के दौरान दीवार पर फिसलने और दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
तुर्कडीहा में विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। बच्चों को पढ़ाई के लिए नदी पार करके उत्क्रमित मध्य विद्यालय चामुदोहर जाना पड़ता है। दूसरा विकल्प करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित बुनियादी मध्य विद्यालय बेलक है। रास्ते की कठिनाई के कारण बरसात में विद्यालय तक पहुंचना और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
गांव तक पुल-पुलिया और पक्की सड़क भी नहीं पहुंची है। चारपहिया वाहन के प्रवेश की व्यवस्था नहीं होने के कारण किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे खाट या पीठ के सहारे नदी पार कराकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। वर्षा के दिनों में सूर्यकुंड क्षेत्र की दो नदियों को पार करना जोखिम भरा रहता है और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कट जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, गांव की आबादी लगभग 600 है। रोजगार के लिए बड़ी संख्या में युवा बाहर जा चुके हैं और गांव में मुख्य रूप से महिलाएं तथा बुजुर्ग रह गए हैं। कभी साक्षरता के क्षेत्र में पहचान रखने वाले इस गांव को 1992 में होलीक्रॉस समाज सेवा केंद्र, हजारीबाग ने पूर्ण साक्षर गांव का दर्जा दिया था। संस्था ने यहां रेशम कीट पालन केंद्र शुरू करने की पहल भी की थी, लेकिन परियोजना समाप्त होने के बाद वह प्रयास आगे नहीं बढ़ सका।
इलाके में जंगली हाथियों का खतरा भी रहा है। करीब पांच वर्ष पहले हाथियों ने गांव पहुंचकर दर्जनों मवेशियों को नुकसान पहुंचाया था। उस समय तत्कालीन उपायुक्त मनीष रंजन ने क्षेत्र का भ्रमण कर क्षति का जायजा लिया था।
बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव के अनुसार, तुर्कडीहा में पुल और सड़क निर्माण की मांग विधानसभा में उठाई जा चुकी है। उनका कहना है कि सरकार से अब तक आश्वासन मिला है और योजना की स्वीकृति के लिए प्रयास जारी है। फिलहाल ग्रामीण सुरक्षित सड़क और पुल की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई नदी पार करने की जोखिमपूर्ण व्यवस्था पर निर्भर है।