रांची के कडरू बगीचा टोली आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को मिलने वाला अंडा और नियमित भोजन फिलहाल बंद है। केंद्र की सेविका रेशमा केरकेट्टा का कहना है कि पोषाहार मद की राशि कई महीनों से नहीं मिली है। पहले स्थानीय दुकानदारों से उधार लेकर खाद्य सामग्री जुटाई गई, लेकिन बकाया बढ़ने के बाद दुकानदारों ने आगे सामान देने से इनकार कर दिया।
हज हाउस के पास स्थित इस केंद्र से कुल 88 लाभार्थी जुड़े हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इनमें आठ गर्भवती महिलाएं, चार धात्री महिलाएं, छह माह से तीन वर्ष आयु वर्ग के 39 बच्चे, तीन से छह वर्ष के 30 बच्चे और 14 से 18 वर्ष की सात किशोरियां शामिल हैं। केंद्र पहुंचने वाले छोटे बच्चों के लिए सेविका ने अपने पास से 100 रुपये खर्च कर बिस्कुट और चॉकलेट की व्यवस्था की।
निर्धारित व्यवस्था में बच्चों को सुबह एक उबला अंडा और दोपहर में चावल-दाल-सब्जी या खिचड़ी दी जानी है। गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए रेडी-टू-ईट पोषण सामग्री का प्रावधान है। सेविका के अनुसार इस सामग्री की आपूर्ति भी नियमित नहीं है, जिससे केंद्र का पोषण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।
एक बच्चे के नाश्ते और भोजन के लिए 11 रुपये 33 पैसे की दर तय होने की जानकारी दी गई है। इसमें 60 ग्राम के एक अंडे के लिए छह रुपये के साथ दाल, सूजी, चीनी, घी, तेल और हरी सब्जी की लागत शामिल है। चावल, ढुलाई, मसाला-नमक और खाना पकाने से जुड़े खर्च भी इसी राशि में समाहित बताए गए हैं।
केंद्र की सेविका के मुताबिक बाजार में एक उबले अंडे की कीमत करीब 10 रुपये हो गई है। ऐसे में निर्धारित राशि के भीतर अंडे के साथ दूसरी खाद्य सामग्री का प्रबंध करना कठिन हो रहा है। राशि समय पर नहीं मिलने के कारण सेविका और सहायिका को अपनी जेब या उधार के सहारे व्यवस्था चलानी पड़ी।
केंद्र के संचालन में भवन किराये का अंतर भी आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। शहरी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र के लिए हर महीने 750 रुपये किराये का प्रावधान बताया गया है, जबकि कडरू बगीचा टोली केंद्र के भवन का मासिक किराया 1,500 रुपये है। उपलब्ध विवरण के अनुसार अतिरिक्त रकम सेविका और सहायिका को अपने मानदेय से चुकानी पड़ रही है।