गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड में सनौर मोड़ से गेरूआ नदी पुल तक जाने वाली सड़क बारिश के बाद जर्जर हो गई है। मार्ग पर कई स्थानों पर बड़े गड्ढे बन गए हैं और उनमें पानी भरने से वाहन चालकों को सड़क की स्थिति समझने में कठिनाई हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है।
यह सड़क स्थानीय आवाजाही के साथ झारखंड और बिहार के कई क्षेत्रों के बीच संपर्क का माध्यम भी है। ग्रामीणों का कहना है कि पश्चिम की ओर इससे बिहार के बांका और भागलपुर सहित अन्य इलाकों से संपर्क बनता है, जबकि पूर्व दिशा में गोड्डा, दुमका और देवघर की ओर जाने वाले लोग भी इसका इस्तेमाल करते हैं। मार्ग पर प्रतिदिन छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है।
सड़क खराब रहने से वाहनों की रफ्तार धीमी हो रही है। कामकाजी लोगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, मरीजों और दूसरे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते से वाहनों का खर्च भी बढ़ रहा है और मरीजों को अस्पताल ले जाने के दौरान विशेष कठिनाई होती है।
गेरूआ नदी पर उच्चस्तरीय पुल बनने के बाद भी उसके दोनों ओर एप्रोच मार्ग की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। बारिश में एप्रोच पथ के कई हिस्सों में कीचड़ और गड्ढे बढ़ जाते हैं। लोगों का कहना है कि पुल की सुविधा का पूरा लाभ तभी मिल सकेगा, जब उससे जुड़ी सड़क का समुचित निर्माण और पक्कीकरण कराया जाए।
रात में जलजमाव के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना और मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस स्थिति में दोपहिया वाहन असंतुलित होने का खतरा बना रहता है। लगातार वाहनों की आवाजाही और बारिश से मार्ग की हालत और खराब होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से सड़क का स्थल निरीक्षण कर स्थायी समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गड्ढों में केवल मिट्टी या गिट्टी डालने की अस्थायी मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने सनौर मोड़ से गेरूआ नदी पुल तक गुणवत्तापूर्ण पक्की सड़क और मजबूत एप्रोच पथ का निर्माण प्राथमिकता से कराने का आग्रह किया है।