बीबीएमकेयू में 25 अक्टूबर को स्मृति सम्मान समारोह, 16 साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी होंगे सम्मानित

धनबाद स्थित बीबीएमकेयू में 25 अक्टूबर को स्मृति सम्मान-2026 समारोह आयोजित होगा। इसमें साहित्य, क्षेत्रीय भाषाओं और कला-संस्कृति से जुड़े 16 लोगों को सम्मान दिया जाएगा।

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धनबाद के बीबीएमकेयू में आयोजित होने वाले स्मृति सम्मान-2026 का सांकेतिक दृश्य

धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) में 25 अक्टूबर को स्मृति सम्मान-2026 समारोह आयोजित किया जाएगा। झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति और खोरठा पत्रिका ‘सहिया’ के संयुक्त आयोजन में राज्य के 16 साहित्यकारों, युवा रचनाकारों तथा कला-संस्कृति से जुड़े व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।

समिति के अनुसार, समारोह का उद्देश्य हिंदी साहित्य के साथ झारखंड की क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं, कला तथा सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करना है। प्रदेश के विभिन्न पुरोधाओं की स्मृति में यह सम्मान पांचवीं बार दिया जा रहा है। सम्मान पाने वालों का चयन चार सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया है।

हजारीबाग के रतन वर्मा को समग्र साहित्यिक योगदान के लिए बिरसा मुंडा शिखर सम्मान मिलेगा। श्याम सुंदर महतो ‘श्याम’ को बिनोद बिहारी महतो स्मृति सम्मान और रांची के महादेव टोप्पो को हिंदी एवं कुड़ुख भाषा में आदिवासी साहित्य के योगदान के लिए डॉ. रामदयाल मुंडा स्मृति सम्मान प्रदान किया जाएगा।

बोकारो के दयानंद बटोही को कथा-साहित्य के लिए राधाकृष्ण स्मृति सम्मान और धनबाद के अनवर शमीम को समकालीन कविता के लिए भारत यायावर स्मृति सम्मान दिया जाएगा। डॉ. लालदीप गोप को कविता-संग्रह ‘गांव के चौराहे पर’ के लिए कॉमरेड महेंद्र प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान मिलेगा।

जमशेदपुर की डॉ. निवेदिता श्रीवास्तव को छंद काव्य के लिए जनार्दन गोस्वामी ‘व्यथित’ स्मृति सम्मान और सविता सिंह ‘मीरा’ को गीत एवं गजल के लिए भाषामित्र सम्मान दिया जाएगा। बोकारो के अजय यतीश को दलित साहित्य, प्रदीप कुमार दीपक को गीत-संगीत और देवघर के फाल्गुनी मरीक कुशवाहा को कला-संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।

युवा श्रेणी में रांची की खुशबू बरनवाल ‘सीपी’, गिरिडीह के भीम कुमार और बोकारो के डॉ. पांडव महतो पुनअरिआर को अलग-अलग सम्मान मिलेंगे। नावाडीह के तारकेश्वर महतो ‘गरीब’ भी भाषामित्र सम्मान से सम्मानित होंगे। समिति ने भविष्य में झारखंड की अन्य भाषाओं को पहल से जोड़कर सम्मान का दायरा बढ़ाने की बात कही है।