बोकारो इस्पात संयंत्र में अधिकारियों और कर्मचारियों के चिकित्सा अवकाश से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत बोकारो जनरल अस्पताल और नगर के स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी से अब अधिकतम सात दिन का मेडिकल रेस्ट दिया जाएगा। इससे अधिक अवधि के आराम की जरूरत होने पर संबंधित कर्मचारी को अस्पताल में भर्ती होने की प्रक्रिया अपनानी होगी।
अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय मरीज की बीमारी और उसकी गंभीरता के चिकित्सकीय आकलन के आधार पर लिया जाएगा। भर्ती होने के बाद जांच और उपचार के दौरान डॉक्टर यह तय करेंगे कि कर्मचारी के चिकित्सा अवकाश की अवधि बढ़ाने की आवश्यकता है या नहीं। कार्यस्थल पर हुई दुर्घटना से प्रभावित अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नियम से अलग रखा गया है।
नई व्यवस्था बोकारो जनरल अस्पताल के साथ संयंत्र के नगर क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लागू होगी। वहां कार्यरत चिकित्सकों को ओपीडी में इलाज के दौरान किसी मरीज को एक सप्ताह से अधिक का मेडिकल रेस्ट नहीं देने का निर्देश दिया गया है। लंबी अवधि के आराम की सलाह अस्पताल में भर्ती और बीमारी की जांच के बाद ही दी जा सकेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, संयंत्र प्रबंधन ने चिकित्सा अवकाश की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और इसके दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। प्रबंधन का मानना है कि सामान्य बीमारी में भी ओपीडी के माध्यम से लंबे अवकाश लेने के कारण कर्मचारियों की कार्यस्थल पर अनुपस्थिति बढ़ रही थी और कामकाज प्रभावित हो रहा था।
बीएसएल में फिलहाल अधिकारी और कर्मचारी बिना किसी चिकित्सकीय अनुमति के तीन दिन तक बीमारी की छुट्टी ले सकते हैं। तीन दिन से अधिक मेडिकल रेस्ट के लिए चिकित्सक की स्वीकृति जरूरी होती है। डॉक्टर बीमारी का कारण और आराम की अवधि कर्मचारी के मेडिकल कार्ड पर दर्ज करते हैं।
बदले हुए नियम में तीन दिन वाली व्यवस्था का उल्लेख यथावत है, जबकि सात दिन से आगे के चिकित्सा आराम के लिए अतिरिक्त शर्त जोड़ी गई है। इसका सीधा असर उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ेगा जिन्हें ओपीडी उपचार के बाद एक सप्ताह से अधिक समय तक काम से दूर रहने की सलाह चाहिए। ऐसे मामलों में अब अस्पताल में भर्ती होकर विस्तृत चिकित्सकीय जांच करानी होगी।