बोकारो में घायल, बीमार और संकट में फंसे हाथियों के लिए विशेष एलीफेंट ट्रांजिट एंड ट्रीटमेंट सेंटर विकसित करने की तैयारी शुरू हुई है। मानव-हाथी संघर्ष की परिस्थितियों में त्वरित बचाव और उपचार की व्यवस्था मजबूत करना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है। वन विभाग ने केंद्र की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
परियोजना की योजना, डिजाइन, संभावित लागत और निगरानी के लिए विशेषज्ञ संस्था की तलाश की जा रही है। प्रस्तावित केंद्र में घायल, बीमार, अनाथ या आक्रामक हाथियों को सीमित अवधि के लिए सुरक्षित रखने की सुविधा होगी। उपचार के बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में वापस भेजने अथवा आवश्यकता के अनुसार पुनर्वास की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
वन विभाग की योजना के अनुसार रांची, हजारीबाग और रामगढ़ में भी हाथी बचाव एवं रिस्पांस सेंटर विकसित किए जाएंगे। बोकारो और आसपास के इलाके हाथियों के पारंपरिक आवागमन क्षेत्रों में आते हैं। खनन, रेलवे लाइन तथा सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों से जंगलों और हाथी गलियारों पर दबाव बढ़ने तथा वन क्षेत्रों के बीच संपर्क घटने की बात सामने आई है।
बोकारो केंद्र में हाथियों के लिए होल्डिंग क्षेत्र, भोजन भंडारण और वाहन पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। डॉक्टरों, पैरावेट और अन्य कर्मचारियों के रहने के लिए भी जरूरी आधारभूत व्यवस्था बनाई जाएगी। उपचार पूरा होने पर हाथियों को धीरे-धीरे जंगल में छोड़ने के लिए ‘सॉफ्ट रिलीज’ सुविधा रखने की योजना है।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रवि रंजन के अनुसार केंद्र को भविष्य में हाथी कैंप के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए आगे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से लाइसेंस लेने की योजना भी है। हालांकि फिलहाल परियोजना डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया में है और उसके डिजाइन तथा लागत का निर्धारण होना बाकी है।
रेस्क्यू व्यवस्था के तहत छह से आठ टन क्षमता वाले हाइड्रोलिक लिफ्टिंग सिस्टम, वेंटिलेशन, एयर कुशन, सीसीटीवी और तापमान निगरानी से लैस विशेष ट्रक तैयार करने का प्रस्ताव है। मौके पर इलाज के लिए बोलेरो चेसिस पर पशु चिकित्सा वैन बनाने की भी योजना है, जिसमें पानी की टंकी, दवा रखने के कैबिनेट, रेफ्रिजरेटर, सिंक और स्ट्रेचर उपलब्ध होंगे।