झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो के भोजूडीह गांव की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामले में निचली अदालत के फैसले को आंशिक रूप से बदल दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दो भाइयों द्वारा संयुक्त रूप से खरीदी गई जमीन में दोनों का आधा-आधा हिस्सा होगा। उस जमीन में उनकी बहन को हिस्सेदार नहीं माना गया है।
जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत ने गंगाधर राजवार की प्रथम अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। गंगाधर राजवार ने अपने भाई राम प्रसाद राजवार के खिलाफ वर्ष 2020 में सिविल कोर्ट में बंटवारे का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने भाइयों की संयुक्त खरीद वाली जमीन और मां की संपत्ति में आधा हिस्सा मांगा था।
निचली अदालत ने दोनों भाइयों और उनकी बहन गीता देवी को संपत्ति में एक-एक तिहाई का हिस्सेदार मानते हुए प्रारंभिक डिक्री पारित की थी। गंगाधर राजवार ने इसी निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अपील पर विचार के बाद हाईकोर्ट ने संयुक्त रूप से खरीदी गई जमीन के संबंध में हिस्सेदारी बदल दी।
हालांकि, मां भीखनी देवी की अपनी अर्जित संपत्ति में निचली अदालत द्वारा तय बराबर हिस्सेदारी को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। अदालत के अनुसार, भीखनी देवी की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति पर दोनों बेटों और बेटी का समान अधिकार बनता है। इस तरह मां की संपत्ति में तीनों भाई-बहन को एक-एक तिहाई हिस्सा मिलेगा।
सुनवाई के दौरान भाइयों की ओर से दावा किया गया था कि बहन ने मौखिक रूप से अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी थी। अदालत के सामने इस दावे के समर्थन में कोई निबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल मौखिक सहमति या बयान के आधार पर किसी महिला का संपत्ति में कानूनी अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संपत्ति पर अपना अधिकार छोड़ना हस्तांतरण की श्रेणी में आता है। इसके लिए कानून के अनुरूप वैध निबंधित दस्तावेज आवश्यक है। फैसले के बाद भाइयों की खरीदी गई जमीन में दोनों की बराबर हिस्सेदारी और मां की संपत्ति में तीनों भाई-बहन का समान अधिकार तय रहेगा।