भवनाथपुर में चलंत लोक अदालत ने ग्रामीणों को दी मुफ्त कानूनी सहायता और योजनाओं की जानकारी

गढ़वा के भवनाथपुर प्रखंड कार्यालय में न्याय रथ कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को निशुल्क वकील, पेंशन, मुआवजा और विवाद समाधान की कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में बताया गया।

2 मिनट पढ़ें 3 बार पढ़ी गई
झारखंड24 का पूर्ण लोगो—प्रकाशक की लोगो-मात्र छवि के स्थान पर

गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड कार्यालय में गुरुवार को चलंत लोक अदालत के माध्यम से ग्रामीणों को कानूनी अधिकारों और सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। झालसा के निर्देश पर आयोजित न्याय रथ कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम ने जरूरतमंद लोगों के लिए उपलब्ध निशुल्क कानूनी सेवाओं को समझाया।

कार्यक्रम में बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर और अन्य पात्र व्यक्तियों को न्याय पाने के लिए मुफ्त अधिवक्ता की सुविधा दी जाती है। तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले पात्र लोगों के साथ अनुसूचित जाति-जनजाति, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजन, जेल में बंद कैदियों और आपदा प्रभावित लोगों को भी यह सहायता मिल सकती है।

पीएलवी अरविंद तिवारी ने अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, पढ़ाई और चिकित्सा के लिए उपलब्ध सहायता की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पात्र अनाथ बच्चों के लिए प्रतिमाह चार हजार रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। ग्रामीणों को बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों से संबंधित पेंशन योजनाओं के बारे में भी बताया गया।

पीएलवी कृष्णानंद दुबे ने कहा कि आर्थिक अभाव जरूरतमंद लोगों के लिए न्याय की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए। लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से प्रखंड, थाना और पंचायत स्तर पर पीएलवी तैनात किए गए हैं, जिनसे पात्र व्यक्ति उपलब्ध सेवाओं की जानकारी ले सकते हैं।

नगर ऊंटारी अनुमंडलीय न्यायालय की पैनल अधिवक्ता सुरेखा गुप्ता ने मध्यस्थता और स्थायी लोक अदालत के जरिए विवादों के समाधान की प्रक्रिया समझाई। एलएडीसीएस सदस्य विजय कुमार पाल ने सड़क दुर्घटना मुआवजा, हिट एंड रन, पारिवारिक विवाद और घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में पीएलवी शाहिना प्रवीण, रामदास राम और अनिल यादव सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। चलंत लोक अदालत का उद्देश्य प्रखंड स्तर पर लोगों को उनके अधिकारों, मुआवजे और पेंशन जैसी सुविधाओं से परिचित कराने के साथ उपलब्ध कानूनी सहायता तक पहुंच आसान बनाना रहा।