मंडल डैम के 780 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की राह खुली, जमीन को मिलेगा राजस्व ग्राम का दर्जा

कैबिनेट के निर्णय के बाद मंडल डैम के डूब क्षेत्र से विस्थापित होने वाले 780 परिवारों को रंका क्षेत्र में जमीन और मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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मंडल डैम परियोजना के डूब क्षेत्र और विस्थापित गांवों का दृश्य

गढ़वा जिले में मंडल डैम परियोजना के डूब क्षेत्र से विस्थापित होने वाले 780 परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, प्रभावित परिवारों को जिस स्थान पर बसाया जाएगा, उसे राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाएगा। इससे पुनर्वास में मिलने वाली जमीन पर परिवारों को रैयती अधिकार मिल सकेंगे।

परियोजना के डूब क्षेत्र में गढ़वा के सात गांव शामिल हैं। ये गांव पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित हैं। चिह्नित परिवारों को गढ़वा के रंका इलाके में बसाने की योजना है। पुनर्वास के लिए निर्धारित भूमि अभी वन भूमि है, जिसे कैबिनेट के फैसले के बाद राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

योजना के तहत प्रत्येक विस्थापित परिवार को एक एकड़ जमीन और 15 लाख रुपये मुआवजा दिया जाना है। जमीन तथा मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार से दूसरे चरण की वन स्वीकृति मिल चुकी है। अब संबंधित विभागों द्वारा भूमि आवंटन और भुगतान की आगे की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है।

पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना के अनुसार, राजस्व भूमि का दर्जा मिलने से पुनर्वास स्थल को लेकर ग्रामीणों का भरोसा बढ़ेगा। परिवारों को यह स्पष्टता होगी कि नई जगह पर मिली जमीन उनके रैयती अधिकार में रहेगी और वहां वे अपने विकास से जुड़े कार्य कर सकेंगे।

विस्थापित परिवारों के मुआवजे के लिए सितंबर 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने 774 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। पुनर्वास, जमीन वितरण और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया के लिए पलामू टाइगर रिजर्व को नोडल एजेंसी बनाया गया है। ताजा निर्णय से सात गांवों के स्थानांतरण की लंबित प्रक्रिया को प्रशासनिक आधार मिलने की उम्मीद है।

उत्तर कोयल नदी पर मंडल डैम परियोजना की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। निर्माण लंबे समय से अधूरा है और पुनर्वास तथा मुआवजे से जुड़े विषय इसके प्रमुख अड़चनों में रहे हैं। वर्ष 2019 में अधूरे काम को पूरा करने के लिए फिर आधारशिला रखी गई थी। परियोजना पूरी होने पर झारखंड और बिहार के क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।