मनातू में स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़े 40 किसान, पांच पंचायतों तक पहुंची पहल

पलामू के मनातू में कंचन देवी ने 50 हजार रुपये के ऋण से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी। अब प्रखंड की पांच पंचायतों के करीब 40 किसान इससे जुड़ चुके हैं।

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मनातू में स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़ी ग्रामीण महिला किसान

पलामू जिले के मनातू प्रखंड में स्ट्रॉबेरी की खेती का दायरा बढ़ रहा है। नौडीहा पंचायत के तीलो गांव की कंचन देवी ने तीन साल पहले 50 हजार रुपये का ऋण लेकर इसकी शुरुआत की थी। अब प्रखंड की सात में से पांच पंचायतों के करीब 40 किसान इस नकदी फसल की खेती से जुड़ चुके हैं। इनमें ग्रामीण महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंचन देवी ने पलाश यानी झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से ऋण लेकर एक एकड़ भूमि में स्ट्रॉबेरी लगाई थी। पहले वर्ष खेती से पांच लाख रुपये का कारोबार होने के बाद उनका उत्साह बढ़ा। उनकी पहल से प्रेरित होकर आसपास के गांवों की दूसरी महिलाओं ने भी पारंपरिक फसलों के साथ स्ट्रॉबेरी उगाना शुरू किया।

यह खेती अब मनातू की पांच पंचायतों तक पहुंच गई है। भीतरी गांव की रीना देवी और सुमित्रा देवी सहित कई महिलाएं इससे जुड़ी हैं। सीमित भूमि पर नकदी फसल अपनाने की यह पहल ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार और अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बन रही है।

जेएसएलपीएस की मनातू प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक नम्रता के मुताबिक, इस वर्ष 18 नए किसानों को भी स्ट्रॉबेरी की खेती से जोड़ने की पहल की गई है। उद्यान विभाग और जेएसएलपीएस के समन्वय से किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें आर्थिक सहायता के साथ स्ट्रॉबेरी के पौधे भी नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आय के नए साधनों से जोड़ना और खेती की लागत संभालने में उनकी मदद करना है। किसानों की बढ़ती भागीदारी से संकेत मिलता है कि मनातू में परंपरागत कृषि के साथ अधिक मूल्य वाली फसलों के प्रति रुचि बढ़ रही है।

हालांकि, स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब होने वाली उपज है। इसलिए खेती के विस्तार के साथ भंडारण, परिवहन और उचित बाजार की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी। बेहतर विपणन व्यवस्था मिलने पर किसानों के लिए उपज को समय पर बेचने और इस पहल को टिकाऊ बनाने की संभावना बढ़ सकती है।