रजरप्पा मंदिर विकास पर हाईकोर्ट ने मांगी प्रगति रिपोर्ट, अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को

मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के पुनरुद्धार और सुविधाओं से जुड़े मामले में पर्यटन सचिव व रामगढ़ डीसी अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने डीपीआर पर हुई कार्रवाई का ब्योरा शपथ पत्र में देने को कहा है।

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रामगढ़ के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर का दृश्य

रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के पुनरुद्धार, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अवमानना मामले की झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत के पूर्व निर्देश के अनुसार पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए।

हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों से पूछा कि मंदिर परिसर के विकास के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन यानी डीपीआर तैयार होने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने सरकार को प्रगति की विस्तृत जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई में बताया गया कि मंदिर परिसर के पुनरुद्धार और विकास के लिए करीब 102 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है। प्रस्ताव में सौंदर्यीकरण के साथ श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने वाले कार्य शामिल हैं। अदालत ने इसी योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर सरकार से जवाब मांगा है।

पर्यटन सचिव की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रस्तावित बजट की राशि अधिक है और इस पर विभागीय प्रक्रिया चल रही है। राशि से संबंधित फाइल विभागीय मंत्री के पास भेजे जाने की जानकारी भी दी गई। स्वीकृति और अगली प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही प्रस्तावित विकास कार्य आगे बढ़ सकेंगे।

अधिकारियों का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने उन्हें आगे की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी। हालांकि, अगली सुनवाई में उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही में सहयोग करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

यह मामला संजीव कुमार सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिका में मंदिर परिसर के विकास और जरूरी सुविधाओं को लेकर जनहित याचिका में पूर्व में दिए गए आदेश के अनुपालन की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान मंदिर परिसर के विस्थापित दुकानदारों की ओर से भी उनका पक्ष रखा गया। अगली तारीख पर सरकार के शपथ पत्र और डीपीआर पर हुई प्रगति की समीक्षा होने की संभावना है।