रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पर्यटन सचिव तथा रामगढ़ के उपायुक्त को अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान पूर्व आदेश के बावजूद पर्यटन सचिव के उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने नाराजगी जताई। सरकार की ओर से बताया गया कि सचिव नीति आयोग के एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए राज्य से बाहर गए हैं। उनकी उपस्थिति के लिए समय देने का आग्रह किए जाने के बाद अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा।
यह मामला मंदिर परिसर के विकास कार्यों के साथ वहां लंबे समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों की आजीविका से भी जुड़ा है। छह अगस्त 2026 को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने परिसर में पहले से व्यवसाय कर रहे 254 दुकानदारों को नई दुकानें आवंटित करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने पात्र दुकानदारों को अनावश्यक देरी के बिना दुकानें देने को कहा था। उसका जोर इस बात पर था कि मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया में उन परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो, जिनका व्यवसाय वर्षों से इसी परिसर पर निर्भर है।
मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए करीब 102 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित योजना में आधुनिक सुविधाओं का विकास, दुकानों को व्यवस्थित करना, यातायात प्रबंधन बेहतर बनाना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़े इंतजाम शामिल हैं।
रजरप्पा का मां छिन्नमस्तिका मंदिर झारखंड के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है और यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अब पांच अक्टूबर की सुनवाई में पर्यटन सचिव और रामगढ़ उपायुक्त की मौजूदगी आवश्यक होगी। अदालत के समक्ष मंदिर विकास से जुड़े निर्देशों तथा दुकानदारों को दुकान आवंटन की स्थिति भी इस मामले के प्रमुख पहलुओं में शामिल है।