रामगढ़ जिले के रजरप्पा में सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां रूपी सोरेन की अस्थियां दामोदर नदी में प्रवाहित कीं। निधन के तेरहवें दिन जाङ बाहा तुपुनाई घाट पर हुए इस संस्कार के दौरान सोरेन परिवार ने संताल समाज की परंपराओं के अनुसार निर्धारित रस्में पूरी कीं।
अस्थि कलश लेकर घाट पहुंचे मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों में हिस्सा लिया। अस्थियों को नदी की धारा में समर्पित करते समय वह भावुक हो गए। वहां उपस्थित लोगों ने भी परिवार के शोक में सहभागिता जताई। पूरे कार्यक्रम के दौरान घाट पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे।
रजरप्पा का यह घाट संताल समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कारों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। परिवार में किसी सदस्य के निधन के बाद पूर्वजों के सम्मान में निभाई जाने वाली परंपराओं के लिए झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों के संताल परिवार यहां पहुंचते हैं। दूसरे राज्यों में रहने वाले समुदाय के लोगों का भी इस स्थान से भावनात्मक जुड़ाव बताया जाता है।
दामोदर और भैरवी नदियों के संगम क्षेत्र में स्थित रजरप्पा मां छिन्नमस्तिका मंदिर के कारण भी प्रसिद्ध है। शक्ति उपासना के केंद्र के साथ ही नदी का तट संताल समाज के पारंपरिक संस्कारों का साक्षी रहा है। इस अवसर पर परिवार ने सांस्कृतिक मान्यताओं का ध्यान रखते हुए अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की।
मुख्यमंत्री के परिवार के लिए यह घाट पहले भी एक शोक संस्कार से जुड़ा रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 17 अगस्त 2025 को हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन की अस्थियां भी इसी दामोदर नदी में प्रवाहित की थीं। इस बार वह अपनी मां के निधन के बाद पारिवारिक रस्म निभाने रजरप्पा पहुंचे।